Haryana news:हिसार, 25 जून: हरियाणा के हिसार जिले के चानौत गांव में लंबे समय से चल रहे पेयजल विवाद के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गांव के लिए अलग पाइपलाइन की मांग पर सहमति जताई है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों की अन्य मांगों को भी स्वीकार करने और समाधान की दिशा में काम करने का भरोसा दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब गांव में पानी को लेकर कई हफ्तों से आंदोलन और तनाव का माहौल बना हुआ था।
चानौत गांव पिछले कई दिनों से पेयजल कनेक्शन की मांग को लेकर सुर्खियों में रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि जब भाखड़ा पाइपलाइन गांव के पास से गुजर रही है, तो गांव को उससे सीधा पानी कनेक्शन मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर गांव में धरना, महापंचायत और आमरण अनशन तक की स्थिति बन गई थी।
लंबे आंदोलन के बाद समाधान की ओर बढ़ा मामला
चानौत गांव का आंदोलन मई के मध्य से लगातार तेज होता गया। ग्रामीणों ने गांव के लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था की मांग उठाई और प्रशासन पर लंबे समय से अनदेखी का आरोप लगाया। आंदोलन के दौरान कई बुजुर्ग ग्रामीणों ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
सरकार और ग्रामीणों के बीच बातचीत के बाद पहले चरण में भाखड़ा पाइपलाइन से गांव को जोड़ने के लिए टी-पॉइंट कनेक्शन देने पर सहमति बनी थी। हालांकि बाद में इसी कनेक्शन को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया, जिससे तनाव दोबारा बढ़ गया।
मुख्यमंत्री ने अलग पाइपलाइन का भरोसा दिया
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चानौत गांव के लिए अलग पाइपलाइन की मांग को स्वीकार किया है। उन्होंने ग्रामीणों की अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख दिखाया और कहा कि गांव की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
यह आश्वासन ग्रामीणों के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा यही था कि गांव को शहर की लाइन से अस्थायी कनेक्शन देने के बजाय स्थायी और अलग जलापूर्ति व्यवस्था दी जाए। ग्रामीण लगातार कह रहे थे कि गांव की जरूरतों के हिसाब से स्वतंत्र पाइपलाइन ही टिकाऊ समाधान है।
भाखड़ा पाइपलाइन को लेकर क्यों भड़का था विवाद?
चानौत गांव की मांग थी कि अमृत योजना के तहत जो भाखड़ा पानी की पाइपलाइन हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही है, उससे गांव को भी सीधा पेयजल कनेक्शन दिया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के पास से गुजर रही पाइपलाइन से पानी लेना सबसे व्यावहारिक और कम खर्चीला समाधान है।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना था कि गांव के लिए राजली हेड से अलग पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है। इसी बात को लेकर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने रहे, क्योंकि ग्रामीण तत्काल और स्थायी समाधान चाहते थे, जबकि प्रशासन अपनी तकनीकी योजना पर जोर दे रहा था।
आंदोलन, अनशन और महापंचायत ने बढ़ाया दबाव
चानौत गांव में आंदोलन केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने कई दौर की पंचायतें कीं, सरकार को अल्टीमेटम दिया और पानी नहीं मिलने पर पाइपलाइन उखाड़ने तक की चेतावनी दी। बाद में पांच बुजुर्ग ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठ गए, जिससे इस मुद्दे ने राज्यभर में ध्यान खींचा।
ग्रामीणों का आरोप था कि गांव की बुनियादी जरूरतों को लगातार टाला गया और चुनावी वादों के बावजूद पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। आंदोलन के दौरान स्थानीय विधायक और प्रशासन दोनों पर सवाल उठे और “नो वाटर, नो वोट” जैसे नारे भी सामने आए।
टी-पॉइंट हटाने के बाद फिर बढ़ा तनाव
मामला तब और बिगड़ गया जब प्रशासन ने रात में कार्रवाई करते हुए गांव में लगाए गए टी-पॉइंट कनेक्शन को हटा दिया। प्रशासन ने इसे अवैध कनेक्शन बताया, जबकि ग्रामीणों का कहना था कि यह सहमति के बाद लगाया गया था। इसी कार्रवाई के बाद गांव में फिर विरोध भड़क गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हल्का बल प्रयोग भी हुआ। इससे साफ हो गया कि पानी का यह विवाद सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक भरोसे और ग्रामीण असंतोष का बड़ा मामला बन चुका है।
अब नजर वादों के क्रियान्वयन पर
मुख्यमंत्री सैनी के आश्वासन के बाद फिलहाल यह विवाद सुलझने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब जमीनी अमल की होगी। गांव के लोग केवल घोषणा नहीं, बल्कि अलग पाइपलाइन, स्थायी जलापूर्ति और बाकी लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
चानौत का यह मामला हरियाणा में ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं, प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनदबाव की राजनीति—तीनों का उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकार का आश्वासन गांव के लिए स्थायी समाधान में बदलता है या यह विवाद फिर किसी नए मोड़ पर पहुंचता है।
