Delhi News:25 जून: देशभर में 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल की 51वीं बरसी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। केंद्र सरकार और BJP नेताओं ने इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में याद करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। BJP ने इस अवसर को लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प के रूप में पेश किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने आपातकाल को बताया संविधान पर हमला
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दिन था जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव डाला गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए संविधान की भावना और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। इसी संदेश के साथ राजधानी सहित कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आखिर 25 जून 1975 को क्या हुआ था?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लागू किया था। उस समय इसे ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर घोषित किया गया था।
आपातकाल मार्च 1977 तक लागू रहा। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए।
‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में क्यों मनाया जाता है यह दिन?
केंद्र सरकार ने 25 जून को प्रतिवर्ष ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह दिन उन लोगों के संघर्ष को याद करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देने के लिए समर्पित है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रम, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और नागरिक अधिकारों के महत्व पर चर्चा की गई।
BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
BJP नेताओं ने आपातकाल को कांग्रेस शासन का सबसे विवादित निर्णय बताते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंचाया गया। पार्टी नेताओं ने इसे सत्ता बचाने के लिए उठाया गया कदम करार दिया।
कई राज्यों में BJP इकाइयों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित कर लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया और युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से परिचित कराने की बात कही।
कांग्रेस और विपक्ष का अलग नजरिया
विपक्षी दलों का कहना है कि आपातकाल का इतिहास अपनी जगह है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर भी समान रूप से चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस ने BJP पर इतिहास का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल का मुद्दा केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है, जिसे अलग-अलग दल अपने-अपने नजरिए से पेश करते हैं।
लोकतंत्र, संविधान और राजनीति के बीच बहस फिर तेज
आपातकाल की 51वीं बरसी ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। एक तरफ इसे लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसके राजनीतिक इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इतना तय है कि 25 जून 1975 की घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसकी चर्चा आज भी राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करती है। आपातकाल की बरसी हर साल देश को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अहमियत की याद दिलाती है।
