Greater Noida West: 5 साल बाद इस सोसायटी से रजिस्ट्री को लेकर अच्छी खबर

ग्रेटर नोएडा- वेस्ट
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Greater Noida West: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के महागुन मंत्रा प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वाले लोगों के लिए आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। कई सालों से अपने घर की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे खरीदारों को अब अदालत से न्याय मिला है। करीब 39 खरीदारों को कोर्ट ने राहत देते हुए उनके फ्लैट की रजिस्ट्री कराने का रास्ता साफ कर दिया है।

यह फैसला उन लोगों के लिए बेहद अहम है जिन्होंने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर घर खरीदा, लेकिन फिर भी कानूनी तौर पर मालिकाना हक नहीं मिल पाया।

क्या है पूरा मामला

महागुन मंत्रा सोसाइटी के कई फ्लैट खरीदार लंबे समय से परेशान थे। उन्होंने बिल्डर को पूरी रकम चुकाने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं करवाई जा रही थी। इस वजह से खरीदारों को अपने ही घर पर पूरा अधिकार नहीं मिल पा रहा था।

रजिस्ट्री न होने का मतलब है कि प्रॉपर्टी कागजों में खरीदार के नाम पर नहीं होती। इससे कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। खरीदार न तो घर बेच सकता है, न किराए पर देने में आसानी होती है और न ही बैंक से लोन या अन्य वित्तीय सुविधाएं मिल पाती हैं।

क्यों अटकी हुई थी रजिस्ट्री

इस मामले में मुख्य समस्या बिल्डर और प्राधिकरण के बीच की प्रक्रियाओं को लेकर बताई जा रही है। कई बार प्रोजेक्ट से जुड़ी कानूनी और वित्तीय औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण रजिस्ट्री अटक जाती है।

खरीदारों का कहना था कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी, लेकिन फिर भी उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे थे। इससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती गई।

कोर्ट का बड़ा फैसला

उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और साफ निर्देश दिए कि सभी लंबित फ्लैट की रजिस्ट्री 90 दिनों के अंदर पूरी की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खरीदारों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

इस फैसले के बाद अब उम्मीद है कि वर्षों से अटकी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और लोगों को उनका अधिकार मिलेगा।

खरीदारों की परेशानी

  • कई सालों तक रजिस्ट्री लंबित रही
  • कानूनी मालिकाना हक नहीं मिल पाया
  • प्रॉपर्टी बेचने या ट्रांसफर करने में दिक्कत
  • बैंक से लोन लेने में समस्या
  • आर्थिक और मानसिक तनाव
  • बार-बार प्राधिकरण और बिल्डर के चक्कर लगाने पड़े

अब क्या बदलेगा

कोर्ट के आदेश के बाद अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। 90 दिनों के अंदर सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की जाएगी। इससे खरीदारों को उनका कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

साथ ही यह फैसला दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां खरीदार इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इससे बिल्डर्स और प्राधिकरण पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे समय पर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।

खरीदारों के लिए क्या है सीख

इस पूरे मामले से एक बड़ी सीख यह मिलती है कि फ्लैट खरीदते समय सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है। साथ ही अगर किसी तरह की परेशानी आती है तो खरीदारों को अपनी आवाज उठानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।

इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि देर भले हो, लेकिन न्याय जरूर मिलता है।