Bird Flue

Bird Flu: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में चिकन खाने वाले सावधान!

ग्रेटर नोएडा- वेस्ट दिल्ली NCR नोएडा
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Bird Flu: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में चिकन खाने वाले लोगों के लिए बड़ी और जरूरी खबर

Bird Flu: अगर आप भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा (Noida-Greater Noida) में रहते हैं और चिकन खाने के शौकीन हैं तो जरा सावधान हो जाइए। नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत यूपी में अब चिकन (Chicken) खाना महंगा पड़ सकता है। आपको बता दें कि गोरखपुर में बर्ड फ्लू से बाघिन की मौत के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कई जू और लायन सफारी में पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। साथ ही नोएडा समेत दूसरे शहरों में बर्ड फ्लू (Bird Flu) को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की तरफ से बर्ड फ्लू से निपटने के निर्देश के बाद स्थानीय वन विभाग भी तैयारियों में जुट गया है। साथ ही कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत जिले में किसी भी पक्षी या जानवर की मौत होने पर उसका पोस्टमॉर्टम (Postmortem) करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर मौत का कारण बर्ड फ्लू होता है तो आगे के कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, पक्षियों की गिनती के निर्देश भी दिए गए हैं। किसी जानवर की मौत होने पर कर्मचारियों को पीपीई किट पहनकर ही उसे हाथ लगाने को कहा गया।

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मंगलवार को लखनऊ में एच-5 एवियन इन्फ्लूएंजा (Bird Flu) संक्रमण की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इससे निपटने के लिए अधिकारियों को कई निर्देश दिए थे। इसी क्रम में जिला वन अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि संक्रमण को गंभीरता से लेते हुए पूरे जिले में निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही बड़े या छोटे किसी भी पक्षी या जानवर की मौत होती है तो उसका पोस्टमॉर्टम करा मौत का कारण जानना अनिवार्य किया गया है। वहीं, माइग्रेट या रेजिडेंशल बर्ड की मास लेवल पर मौत होती है तो उसकी जानकारी इकट्ठा कर रिपोर्ट बनानी होगी। माइग्रेट या रेजिडेंशल बर्ड के मूवमेंट पर भी रिपोर्ट बनाना जरूरी कर दिया गया है।

लगातार हो रहा है निगरानी

वन अधिकारी ने जानकारी दी कि पक्षियों की गिनती पीक समय या दिसंबर में होती है, जब दूसरे जगहों से वे वेटलैंड में आते हैं। लेकिन, बर्ड फ्लू की वजह से निर्देश दिए गए हैं कि जिले के सभी क्षेत्रों में इनकी गिनती की जाए। संख्या में हो रहे बढ़ोतरी या गिरावट की रिपोर्ट बनाकर तैयार रखा जाए। वेटलैंड के फील्ड स्टाफ से कहा गया है कि किसी भी प्रकार का केस मिलता है तो फौरन अधिकारियों से मिलें और जो भी मेडिकल सुरक्षा दी जा सकता है दें। लगातार निगरानी करते रहें।

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यह क्या है कारण

आपको बता दें कि यूपी के गोरखपुर जू में 7 मई को बाघिन की मौत के बाद विसरा रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बाद लखनऊ में 6 दिनों तक चिड़ियाघर और लायन सफारी को विजिटर्स के लिए बंद किया गया है। वहीं, गोरखपुर जू में बाघ को भी बर्ड फ्लू होने की आशंका है।
प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, जिला वन अधिकारी ने कहा कि सभी प्राणी उद्यानों, पक्षी विहारों और वेटलैंड क्षेत्रों में संरक्षित पशु-पक्षियों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है। हमारे क्षेत्र में बर्ड फ्लू से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमारी कोशिश है कि कोई भी पक्षी या जानवर की मौत समय से पहले किसी बीमारी से न हो।

जिले में कुल 162 वेटलैंड

वन अधिकारी के मुताबिक जिले में कुल 162 वेटलैंड हैं। इनमें छोटे-बड़े वेटलैंड शामिल हैं। 2.5 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र वाले 30 बड़े वेटलैंड की पहचान हुई है। अन्य बड़े वेटलैंड्स में 7.98 हेक्टेयर क्षेत्र की जारचा वेटलैंड, 5.95 हेक्टेयर की बिलासपुर वेटलैंड, लगभग पांच हेक्टेयर क्षेत्र की चौना, ओखला बर्ड सैंक्चुकी, धनौरी, सूरजपुर वेटलैंड शामिल हैं। पिछले रेकॉर्ड के मुताबिक जिले में 783 बड़े और छोटे वेटलैंड थे। इनमें से दादरी ब्लॉक में 288, जेवर में 260 और दनकौर ब्लॉक में 191 थे। अब इनमें से कई का अस्तित्व समाप्त हो चुका है।