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Education: MBA, BTech, CA में एडमिशन के लिए लाखों की फीस लेकिन नौकरी कितने की मिलती है?

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Education: भारतीय परिवारों में बच्चों के करियर को लेकर एक तय फॉर्मूला लंबे समय से चलता आ रहा है—खूब पढ़ाई करो, एक सम्मानित डिग्री हासिल करो और फिर अच्छी नौकरी पाकर जिंदगी सेट कर लो। इस सोच के लिए माता-पिता अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं। वे अपनी बचत, सपने और यहां तक कि करियर तक कुर्बान कर देते हैं, ताकि उनके बच्चे इंजीनियरिंग, MBA या CA जैसे प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला ले सकें। कई परिवार तो इसके लिए कर्ज भी ले लेते हैं।

इस त्याग के पीछे माता-पिता की एक उम्मीद और एक तरह का स्वार्थ भी होता है—इन प्रोफेशनल कोर्स से मिलने वाला अच्छा रिटर्न, यानी एक अच्छी नौकरी और बेहतर भविष्य। लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि अब ये कोर्स पहले की तरह उतने कारगर नहीं रहे हैं। डिग्री बेकार नहीं जाती, लेकिन भारी निवेश के बाद भी प्लेसमेंट और पैकेज के स्तर पर उम्मीद के मुताबिक रिटर्न मिलता नहीं दिख रहा है।

30 से 40 लाख का खर्च, लेकिन शुरुआती सैलरी सिर्फ 4 से 6 लाख

फाइनेंस ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, MBA और CA जैसे प्रोफेशनल कोर्स में भारी निवेश करने वाले परिवारों को उस स्तर का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) नहीं मिल रहा है, जिसकी वे उम्मीद करते हैं।

रिपोर्ट बताती है कि कई परिवार इन डिग्रियों के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक खर्च करते हैं। इसके बावजूद कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को सालाना 4 से 6 लाख रुपये की शुरुआती सैलरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।

इस स्थिति ने कई परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद मिलने वाली नौकरी वास्तव में उस निवेश के लायक है।

महंगी शिक्षा और धीमी सैलरी ग्रोथ से घट रही डिग्री की वैल्यू

रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जबकि सैलरी ग्रोथ की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। इसके अलावा, इंडस्ट्री की जरूरत और छात्रों के स्किल सेट के बीच बढ़ता अंतर भी बड़ी समस्या बनता जा रहा है।

उदाहरण के तौर पर, मुंबई के एक मिड-रेंज प्राइवेट कॉलेज से चार साल का बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) कोर्स करने में लगभग 17.30 लाख रुपये की फीस लगती है। अगर इसमें स्कूली पढ़ाई का खर्च भी जोड़ दिया जाए, तो कुल निवेश लगभग 34 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

वहीं, एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को नौकरी की शुरुआत में औसतन 4.74 लाख रुपये सालाना सैलरी मिलती है। यदि इसमें महंगाई और दैनिक खर्चे भी जोड़ दिए जाएं, तो इस निवेश की भरपाई करने में 20 साल से ज्यादा समय लग सकता है।

MBA संस्थानों की संख्या बढ़ी, लेकिन नौकरी के अवसर नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, देश में AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) से मान्यता प्राप्त MBA कराने वाले संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

  • 2021-22 में MBA संस्थानों की संख्या: 3,095
  • 2025-26 में MBA संस्थानों की संख्या: 3,465

लेकिन जिस तेजी से संस्थानों की संख्या बढ़ी है, उसी गति से क्वालिटी जॉब क्रिएशन नहीं बढ़ा है। इसका असर प्लेसमेंट पर साफ दिखाई दे रहा है।

साल 2024 में टॉप नौ बिजनेस स्कूलों में से सात में प्लेसमेंट सैलरी (पैकेज) में गिरावट दर्ज की गई। उदाहरण के तौर पर, IIM इंदौर में साल-दर-साल प्लेसमेंट सैलरी में लगभग 15 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

इंजीनियरिंग और MBA ग्रैजुएट्स को तुरंत नौकरी नहीं मिल रही

रिपोर्ट में ‘अनस्टॉप टैलेंट रिपोर्ट 2025’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोजगार की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।

इसके मुताबिक:

  • 46 प्रतिशत बिजनेस स्कूल ग्रैजुएट को कोर्स खत्म होने के तुरंत बाद इंटर्नशिप या नौकरी नहीं मिलती।
  • 83 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रैजुएट को भी पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत रोजगार नहीं मिलता।

ये आंकड़े बताते हैं कि डिग्री हासिल करना अब नौकरी की गारंटी नहीं रह गया है। छात्रों को अतिरिक्त स्किल, अनुभव और सही दिशा की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है।

CA क्षेत्र में भी बढ़ा प्रतियोगिता का दबाव

चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की फील्ड, जिसे पहले सबसे सुरक्षित और प्रतिष्ठित करियर विकल्प माना जाता था, वहां भी प्रतियोगिता तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • 2019 में CA परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या: 6 लाख
  • 2025 में यह संख्या बढ़कर: 12 लाख

इस बढ़ती संख्या के कारण प्रतियोगिता बहुत ज्यादा हो गई है। इसका परिणाम यह है कि सेमी-क्वालिफाइड उम्मीदवारों को शुरुआती स्तर पर केवल 3 से 4 लाख रुपये सालाना की नौकरियां ही मिल पा रही हैं।

बदलते समय में करियर चुनने का तरीका भी बदलना होगा

आज के समय में केवल डिग्री हासिल करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। इंडस्ट्री की जरूरत तेजी से बदल रही है और कंपनियां अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल, अनुभव और नई तकनीक की समझ को ज्यादा महत्व दे रही हैं।

इसलिए छात्रों और अभिभावकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे करियर चुनते समय केवल पारंपरिक कोर्स पर भरोसा न करें, बल्कि नई स्किल्स, टेक्नोलॉजी और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

इंजीनियरिंग, MBA और CA जैसे प्रोफेशनल कोर्स आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनका ROI पहले जैसा मजबूत नहीं रहा है। महंगी फीस, बढ़ती प्रतियोगिता और धीमी सैलरी ग्रोथ ने इन डिग्रियों की आर्थिक वैल्यू को प्रभावित किया है।

अब समय आ गया है कि परिवार और छात्र करियर के फैसले सोच-समझकर लें और केवल डिग्री के बजाय सही स्किल और रोजगार की संभावनाओं पर ज्यादा ध्यान दें। यही भविष्य में सफलता की असली कुंजी साबित होगी।