Zee मीडिया में चल रहे महिला एंकर-संपादक विवाद की पूरी क्रोनोलॉजी..सच-झूठ का फ़ैसला आप कीजिए

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पिछले कई दिनों से नोएडा फिल्म सिटी में एंकर-संपादक विवाद ने ज़ोर पकड़ा हुआ है। अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है क्योंकि चैनल की महिला एंकर ने संपादक समेत कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। और इसके पीछे की दलील भी सामने रखी है। कौन सच है..कौन झूठ इसका फ़ैसला हम आप पर छोड़ रहे हैं। लेकिन आरोप तो आरोप होते हैं, कहीं ना कहीं..कुछ ना कुछ तो सच्चाई ज़रूर होगी। लेकिन इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पूरे मामले पर एक सनसनीख़ेज ख़ुलासा भी सामने आ रहा है।

आरोप है कि जिस महिला एंकर ने जी मीडिया संस्थान और जी यूपी के संपादक पर जो आरोप लगाए हैं, उसका सूत्रधार लखनऊ में बैठा एक तथाकथित पत्रकार है। जो ज़ी यूपी में ही काम करता है और जो महिला एंकर आरोप लगा रही है वो उसकी ‘अजीज’ मित्र है. अब आपको इस पूरे विवाद की मूल जड़ तक ले जाते हैं, जिसकी वजह से पूरी साजिश रची गई.

हर व्यक्ति की इच्छाएं होती हैं कि वो अपने कार्यक्षेत्र में शीर्ष तक पहुंचे. पर कुछ लोग इसके लिए शॉर्ट कट अपनाते हैं और साजिशें रचते हैं. आरोपों के मुताबिक वहीं काम महिला एंकर के ‘अजीज’ मित्र ने किया।

खबरें ये भी हैं कि वो अपने संपादक को बगैर बताए उन खबरों को चलवाता था जोकि पहले से ही प्लांटेड होती थीं. यही नहीं नाम छिपाने की शर्त पर न्यूजरुम के लोगों ने बताया कि अजीज मित्र ने दलाली और अवैध उगाही के लिए कुछ जिलों में स्ट्रिंगर के नाम पर अपने गुर्गे तैनात कर दिए थे, जिसकी जानकारी संपादक तक को नहीं थी.
आरोपों के मुताबिक हैरान करने वाली बात ये है कि कुछ अज्ञात लोगों ने, अजीज मित्र के रखे गए स्ट्रिंगर और कैमरामैन के कुछ ऐसे दस्तावेज जी यूपी के संपादक को भेजे जिनसे साफ होता था की वो आपराधिक प्रवर्ति के हैं और उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं. इसके बाद उन्होंने इस पूरे मामले को मैनेजमेंट के सामने रखा. संस्थान ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई और तथ्यों के आधार पर उन स्ट्रिंगर के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की.
आरोप है कि अपने गुर्गों के खिलाफ हुई कार्रवाई से बौखलाए सूत्रधार ने अपनी ही बहुत बहुत अजीज महिला मित्र (जो की ZEE के ही दूसरे चैनल में एंकर थी) को प्लान B के तहत षड़यंत्र का हिस्सा बनाया. लखनऊ में बैठे तथाकथित पत्रकार ने उस महिला मित्र को आर्थिक मदद का आश्वासन देकर पूरी पटकथा तैयार की।
ख़बर है कि स्क्रिप्ट के तहत महिला एंकर ने ज़ी यूपी के संपादक पर अभद्र टिप्पणी और शोषण का आऱोप लगाया और इसकी शिकायत मैनेजमेंट से की. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि मनगढंत आरोप लगाने वाली महिला एंकर इसी संस्थान के दूसरे चैनल में काम करती है और उसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जी यूपी के संपादक से कोई वास्ता नहीं है और ना ही जी यूपी का संपादक उस महिला एंकर का रिपोर्टिंग मैनेजर है।
महिला एंकर के आऱोपों पर मैनेजमेंट ने पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल जी यूपी के संपादक रमेश चंद्रा को 50 दिन की छुट्टी पर जाने का आदेश दिया. ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके. 50 दिन की जांच के बाद संस्थान ने जी यूपी के संपादक को निर्दोष पाया और छवि खराब करने के आरोप में महिला एंकर पर एक्शन लिया.
इधर आरोपों के मुताबिक अजीज की महिला एंकर मित्र पर एक्शन हुआ और उधर लखनऊ में बैठे तथाकथित पत्रकार ने षड़यंत्र के तहत अपना अगला मोहरा खेला. अजीज मित्र के आदेश पर महिला एंकर ने जी मीडिया और जी यूपी के संपादक पर सोशल मीडिया में फर्जी आरोप लगाने शुरु कर दिए।
नाम छिपाने की शर्त पर महिला एंकर के सहकर्मियों ने बताया है कि किसी की शह पर वो न्यूजरूम में मनमानी करती थी. किसी की शहगर्दी में ये महिला एंकर अपने अधीनस्थों की नौकरी खाने से भी बाज नहीं आईं, सूत्र बताते हैं कि वो यहां तक बोलती थी कि या तो मेरे इशारे पर काम करो वरना नौकरी गवाओ, वो बात बात पर फर्जी FIR, यहां तक की मेकअप रुम में भी ऐसी हरकतें थी जिसका जिक्र करना शूचिता के खिलाफ है। आरोप है कि कार्रवाई से बौखलाई महिला एंकर सोशल मीडिया पर अनाप शनाप आऱोप लगाने शुरु कर दिए, सम्मानित संस्थान के खिलाफ मौके की तलाश में बैठे मगरमच्छों ने इस मामले को तुरंत लपका।
खबरें तो ये भी हैं कि इस षड़यंत्र से पहले अजीज ने अपनी महिला मित्र को राजनीति के सुनहरे सपने दिखाए. कहा जा रहा है कि महिला मित्र ने दिल्ली की एक क्षेत्रीय पार्टी से टिकट भी मांगा था. लेकिन नाकामी मिली, साजिश के सूत्रधार ने हैदराबाद से चलने वाली कट्टरपंथी पार्टी से टिकट दिलाने का वादा किया है. ऐसे में आरोप ये भी है कि महिला एंकर की अति महत्वकांक्षा को सूत्रधार अजीज मित्र ने हथियार बनाया है और एक सम्मानित संस्थान और संपादक को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। पूरे मामले को पढ़ने के बाद क्या सच है और क्या झूठ..ये फ़ैसला आपको करना है।

(Discalimer-ख़बरीमीडिया को भेजे गए पत्र पर आधारित..ख़बरीमीडिया इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।