Chhattisgarh News: रायपुर में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का स्वागत, मुख्यमंत्री साय ने किया सम्मान

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 फरवरी 2026 को एक खास अवसर देखने को मिला। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के राज्य आगमन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस मौके पर न्यायपालिका और राज्य सरकार के बीच सम्मान और सहयोग की भावना साफ नजर आई।

मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय स्वागत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्य न्यायाधीश को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले उपहार भी प्रदान किए। इसमें राजकीय गमछा, विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक और बेल मेटल से बनी भगवान श्रीराम व माता शबरी की प्रतिकृति शामिल थी।

इन उपहारों के माध्यम से राज्य की समृद्ध परंपरा और कला को दर्शाने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी संस्कृति, लोककला और परंपराओं के लिए देशभर में जाना जाता है।

अन्य न्यायाधीशों का भी स्वागत

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पी. नरसिम्हा और प्रशांत कुमार मिश्रा का भी स्वागत किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा का भी अभिनंदन किया गया।

यह कार्यक्रम न्यायपालिका और राज्य सरकार के बीच आपसी सम्मान का प्रतीक बना।

दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने रायपुर पहुंचे हैं। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय देश के प्रमुख विधि संस्थानों में से एक है। यहां हर साल बड़ी संख्या में छात्र कानून की पढ़ाई पूरी कर देश की न्याय व्यवस्था में योगदान देने के लिए आगे बढ़ते हैं।

दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जा रही है।

न्याय और प्रशासन का संतुलन

इस दौरे को राज्य के लिए अहम माना जा रहा है। न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर तालमेल लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और कानून के शासन को सर्वोपरि रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

रायपुर में हुए इस स्वागत समारोह ने यह संदेश दिया कि संविधान के मूल्यों और संस्थाओं के प्रति सम्मान ही लोकतंत्र की असली ताकत है।