Chhattisgarh News: संजू देवी को 50 लाख की प्रोत्साहन राशि, कबड्डी में शानदार प्रदर्शन का सम्मान

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए राज्य सरकार ने 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है। यह राज्य में पहली बार है जब किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी रकम दी गई है। उप मुख्यमंत्री और खेल मंत्री अरुण साव ने उन्हें यह सम्मान सौंपा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संजू देवी ने अपने खेल से देश और राज्य का नाम रोशन किया है और यह पुरस्कार उनके कठिन परिश्रम का परिणाम है।

कबड्डी वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन
संजू देवी ने कबड्डी वर्ल्ड कप में बेहतरीन खेल दिखाया था। उन्हें पूरे टूर्नामेंट में ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ चुना गया था। फाइनल मैच में भारत के 35 अंकों में से 16 अंक अकेले संजू ने दिलाए थे। सेमीफाइनल और अन्य मुकाबलों में भी उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, जिससे भारत को खिताब जीतने में बड़ी मदद मिली।

छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर
कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से आने वाली संजू देवी का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बीच अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। वह बिलासपुर की बहतराई कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण लेती रही हैं, जहां उन्होंने अपने खेल को निखारा और आगे बढ़ने का मौका पाया।

एशियन चैंपियनशिप में भी दिलाई जीत
सिर्फ वर्ल्ड कप ही नहीं, संजू देवी ने एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली और उन्होंने हर मौके पर अपनी प्रतिभा साबित की।

सरकार का खिलाड़ियों को बढ़ावा देने पर जोर
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किया गया है। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक युवा खेलों में आगे आएं और देश का नाम रोशन करें।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी संजू देवी
संजू देवी की सफलता आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित किया कि मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों के साथ कोई भी बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी यह दिखाती है कि छोटे गांव से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।