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Chhattisgarh News: जहां सड़कें खत्म, वहां भी इलाज शुरू: सुकमा की पहाड़ियों में पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं, 310 किलोमीटर का सफर तय कर मिला उपचार

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन सरकार के प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो जहां सड़कें खत्म होती हैं, वहां भी इलाज शुरू किया जा सकता है।

इसी का एक प्रेरणादायक उदाहरण Sukma जिले में देखने को मिला है, जहां स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक मरीज को समय पर इलाज दिलाने के लिए 310 किलोमीटर का लंबा सफर तय कराया। इस प्रयास ने न केवल एक मरीज की जान बचाई, बल्कि यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य सेवाएं अब दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।

दुर्गम गांव से जिला अस्पताल तक पहुंचाने में स्वास्थ्य टीम की अहम भूमिका

यह पूरी पहल कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और मार्गदर्शन में संभव हो सकी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पोटकपल्ली स्वास्थ्य केंद्र से मरीज को पहले किस्टाराम और फिर जिला अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया।

इस दौरान मरीज को पहाड़ी और कठिन रास्तों से गुजरते हुए कुल 310 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी। यदि समय पर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस सफलता के पीछे लगातार स्क्रीनिंग, प्रभावी काउंसलिंग, समय पर रेफरल और मजबूत फॉलो-अप व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

17 मरीजों को किया गया रेफर, 14 आयुष्मान कार्ड बनाए गए

स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत किस्टाराम और मरईगुड़ा के अंदरूनी गांवों से कुल 17 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।

इनमें से 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर प्रिंट किए गए, ताकि इलाज के दौरान उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

Ayushman Bharat योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं से अब गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।

इसके अलावा,

  • 2 मरीज अस्थमा से पीड़ित पाए गए
  • 2 मरीज पैरों में सूजन की समस्या से ग्रसित थे
    इन सभी मरीजों को विशेष जांच और उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

आंखों की जांच और मुफ्त चश्मा वितरण से मिली राहत

अभियान के दौरान केवल गंभीर मरीजों का इलाज ही नहीं किया गया, बल्कि सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

कोंटा क्षेत्र से आए मरीजों की आंखों की जांच की गई, जिसमें 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया। वहीं मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन की सलाह दी गई, ताकि उनकी दृष्टि को बेहतर बनाया जा सके।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य विभाग केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। 👓

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स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत से सफल हुआ अभियान

मरईगुड़ा सेक्टर और पोटकपल्ली टीम के स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और समर्पण ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे खराब सड़कें, लंबी दूरी और सीमित संसाधन।

इसके बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने हार नहीं मानी और मरीजों तक पहुंचकर उन्हें समय पर इलाज दिलाने में सफलता हासिल की।

दूरस्थ क्षेत्रों के लिए जीवनदायी साबित हो रहा स्वास्थ्य बस्तर अभियान

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य बस्तर अभियान जैसे कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों के लिए जीवनदायी साबित हो रहे हैं।

इस अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उन गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा लगभग न के बराबर थी।

इस पहल से न केवल मरीजों को समय पर उपचार मिल रहा है, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

सुकमा जिले में स्वास्थ्य बस्तर अभियान की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और समर्पित टीम के प्रयास से दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती हैं।

जहां सड़कें खत्म होती हैं, वहां भी इलाज शुरू हो सकता है — यह संदेश इस अभियान ने पूरे प्रदेश को दिया है।

आने वाले समय में यदि इसी तरह के प्रयास जारी रहे, तो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी और उनका जीवन स्तर भी लगातार सुधरेगा।