Chhattisgarh News: बारनवापारा के जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, वन विभाग में उत्साह

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत आने वाले देवपुर जंगल में दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी यानी जायंट मालाबार स्क्विरल दिखाई दी है। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखाई देने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह का माहौल है। इसे प्रदेश की जैव विविधता और वन संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

देवपुर समर कैंप के दौरान हुई दुर्लभ प्रजाति की पहचान

बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। इसी कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी और साइबर रिस्क एक्सपर्ट श्री हेमंत वर्मा ने की।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह प्रजाति सामान्य रूप से बहुत कम दिखाई देती है। ऐसे में इसका देवपुर जंगल में दिखाई देना इस क्षेत्र के स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत माना जा रहा है।

वन मंत्री ने दी टीम को बधाई

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लगातार जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। इसी वजह से दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हो रहा है। वन मंत्री ने कहा कि प्रदेश की जैव विविधता को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

विशाल भारतीय गिलहरी का वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका (Ratufa indica) है। यह भारत की सबसे बड़ी वृक्षों पर रहने वाली गिलहरियों में गिनी जाती है। इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक हो सकती है।

इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है, जो इसे अन्य गिलहरियों से अलग बनाता है। यह ज्यादातर समय पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति

यह दुर्लभ प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार करना या व्यापार करना कानूनन अपराध माना जाता है।

वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन क्षेत्र सुरक्षित और संतुलित है।

उन्होंने कहा कि समर कैंप में शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। वन विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।