Chhattisgarh News: रायपुर, 18 जून 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर व्यवस्था ने छात्रों के लिए पढ़ाई को पहले से अधिक आसान, सुरक्षित और लचीला बना दिया है। केंद्र सरकार और राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से लागू की गई यह व्यवस्था अब पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और लाखों छात्रों को इसका लाभ मिल रहा है।
क्या है एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट?
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट यानी ABC एक डिजिटल व्यवस्था है, जहां छात्रों की पढ़ाई के दौरान अर्जित किए गए क्रेडिट सुरक्षित रखे जाते हैं। इसे एक ऐसे बैंक की तरह समझा जा सकता है, जहां पैसे की जगह शिक्षा से जुड़े अंक और उपलब्धियां जमा होती हैं।
अगर किसी छात्र को किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ जाए, तो उसकी मेहनत बेकार नहीं होती। उसके द्वारा अर्जित क्रेडिट सुरक्षित रहते हैं और वह भविष्य में किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकता है।
पढ़ाई में मिलेगा दूसरा मौका
नई व्यवस्था के तहत छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकते हैं। यदि कोई छात्र पहले या दूसरे वर्ष के बाद पढ़ाई छोड़ देता है, तो बाद में वापस प्रवेश लेकर वहीं से अपनी शिक्षा आगे बढ़ा सकता है।
इससे आर्थिक, पारिवारिक या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को नया अवसर मिलेगा और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के लाखों छात्रों को लाभ
राज्य के सभी 33 जिलों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। करीब 6.5 लाख छात्र-छात्राएं इस डिजिटल प्रणाली से जुड़े हुए हैं। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय समेत सभी प्रमुख विश्वविद्यालय और महाविद्यालय इसमें शामिल हैं।
इससे छात्रों को देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़ने और बेहतर अवसर प्राप्त करने में मदद मिल रही है।
डिजीलॉकर बना छात्रों का डिजिटल सुरक्षा कवच
पहले मार्कशीट, डिग्री और प्रमाण पत्र खो जाने पर छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब डिजीलॉकर इस समस्या का स्थायी समाधान बनकर सामने आया है।
विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाण पत्र सीधे डिजीलॉकर में अपलोड किए जा रहे हैं। ये दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं और इन्हें कहीं भी ऑनलाइन प्रस्तुत किया जा सकता है।
नौकरी, प्रवेश या किसी अन्य प्रक्रिया के दौरान छात्रों को अब दस्तावेजों की हार्ड कॉपी लेकर घूमने की आवश्यकता नहीं है।
केंद्र सरकार का पूरा सहयोग
इस डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इससे राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा है।
दूर-दराज क्षेत्रों के छात्रों को भी फायदा
सुकमा, बीजापुर, सरगुजा और बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को भी अब वही सुविधाएं मिल रही हैं, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।
यह पहल ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
युवाओं को मिल रहे नए अवसर
ABC ID और क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली के माध्यम से छात्र अब केवल अपने विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रह गए हैं। वे देश के विभिन्न संस्थानों से जुड़कर अपनी शिक्षा को आगे बढ़ा सकते हैं।
यह व्यवस्था छात्रों को अधिक लचीलापन, बेहतर अवसर और भविष्य के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
उच्च शिक्षा का नया डिजिटल युग
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और डिजीलॉकर केवल तकनीकी बदलाव नहीं हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। इससे छत्तीसगढ़ के लाखों युवाओं को अपनी शिक्षा और करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
