Bihar News: पटना, 12 जून 2026। बिहार ने पिछले दो दशकों में सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। योजना एवं विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य ने मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार सुधार किया है। इन उपलब्धियों ने बिहार को देश के तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में शामिल कर दिया है।
मानव विकास सूचकांक में हुआ बड़ा सुधार
मानव विकास सूचकांक (HDI) के मामले में बिहार ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2006 में राज्य का एचडीआई 0.485 था, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 0.614 हो गया। यह लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के क्षेत्र में लगातार सुधार हुआ है।
गरीबी कम करने में देश में सबसे आगे
नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार बिहार ने गरीबी कम करने के मामले में देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच राज्य में बहुआयामी गरीबी 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई। इस दौरान 18.13 प्रतिशत अंकों की कमी दर्ज हुई, जो देश में सबसे अधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में गरीबी में 9.89 प्रतिशत अंकों की कमी आई थी। यह उपलब्धि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवास और बुनियादी सेवाओं में किए गए निवेश का परिणाम मानी जा रही है।
आर्थिक विकास को मिली नई रफ्तार
बिहार की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2004 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 5,780 रुपये थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 76,490 रुपये हो गई। यह लगभग 13 गुना वृद्धि है। इस दौरान बिहार ने करीब 13 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर हासिल की, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ा खर्च
राज्य सरकार ने विकास और सामाजिक क्षेत्रों पर लगातार निवेश बढ़ाया है। वर्ष 2005-06 में प्रति व्यक्ति विकास व्यय 1,463 रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 13,279 रुपये हो गया। इसी अवधि में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च 14.8 गुना और शिक्षा क्षेत्र पर व्यय 13.2 गुना बढ़ा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2005-06 में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 19.9 था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 81.1 प्रतिशत हो गया। वहीं जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष हो गई है।
पोषण, रोजगार और एसडीजी में बेहतर प्रदर्शन
बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार दर्ज किया गया है। ठिगनापन (स्टंटिंग) 20 प्रतिशत अंक, कम वजन (अंडरवेट) 20.2 प्रतिशत अंक और क्षीणता (वेस्टिंग) 8.1 प्रतिशत अंक तक कम हुई है। रोजगार के क्षेत्र में भी बिहार की स्थिति बेहतर हुई है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे 2024 के अनुसार राज्य की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 3.2 प्रतिशत से कम है।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भी बिहार ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। स्वच्छ जल और स्वच्छता के क्षेत्र में राज्य 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा। अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में बिहार का स्कोर 44 से बढ़कर 67 हो गया है। वहीं समग्र एसडीजी स्कोर 48 से बढ़कर 57 पहुंच गया, जिससे बिहार ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में शामिल हो गया है।
इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि बिहार सामाजिक और आर्थिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मानव विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में हुए सुधार विकसित बिहार के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
