Bihar News: बिहार सरकार कला, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर गंभीर कदम उठा रही है। इसी दिशा में भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कला एवं संस्कृति विभाग की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के लिए एक विशेष विंग (स्पेशल विंग) बनाने का निर्देश दिया है। पटना में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन भवनों की प्रगति, संग्रहालयों के विकास और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई।
अटल कला भवन और सभागार परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में बताया गया कि अररिया, भभुआ, बक्सर, नवादा, सीवान और शेखपुरा सहित कई जिलों में 620 क्षमता वाले अटल कला भवनों का निर्माण तेजी से चल रहा है। विभाग का लक्ष्य इन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना है।
इसके अलावा बांका और लखीसराय में 630 क्षमता वाले सभागारों का निर्माण कार्य जारी है। लखीसराय में सभागार का फिनिशिंग कार्य चल रहा है। वहीं मुजफ्फरपुर में 2000 क्षमता वाले बड़े सभागार के निर्माण को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सचिव ने अभियंताओं को गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान
समीक्षा बैठक में दरभंगा के स्मारक अहिल्या स्थल, बेगूसराय संग्रहालय, लखीसराय स्थित लाल पहाड़ी पुरास्थल, नेपाली मंदिर और नारद संग्रहालय के स्थान पर बनाए जाने वाले नए संग्रहालय भवन सहित कई परियोजनाओं पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही राज्य के 26 जिलों में स्थित 56 पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। सरकार इन स्थलों को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करना चाहती है।
धरोहर संरक्षण के लिए बनेगा विशेष विंग
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के लिए स्पेशल विंग बनाने की रही। सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों को उनके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी ताकि किसी भी संरचना की ऐतिहासिक पहचान और मौलिकता प्रभावित न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अभियंताओं को धरोहर संरक्षण से जुड़ी तकनीकी बारीकियों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि संरक्षण कार्य बेहतर तरीके से हो सके।
संग्रहालयों के रखरखाव और गुणवत्ता पर जोर
बैठक में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय और स्मृति स्तूप के रखरखाव को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि संग्रहालयों की देखभाल और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि आने वाले वर्षों में भी उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय पर पूरी हों और निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता से समझौता न किया जाए। साथ ही लंबित परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार संवेदकों पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई।
समयबद्ध विकास के साथ धरोहरों का संरक्षण
बिहार सरकार की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एक ओर जहां नए सांस्कृतिक भवनों और सभागारों का निर्माण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी भी की जा रही है।
