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Bihar सरकार का बड़ा कदम, राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों को NQAS सर्टिफाइड करने पर दिया जोर

बिहार
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⁠तीन स्तरों पर हो रहा संस्थानों का चयन

गुणवत्ता मानकों के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य ने तेज किए कदम

Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के अनुरूप विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों को एनक्यूएएस प्रमाणन दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है, जिससे आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

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तीन स्तरों पर हो रहा स्वास्थ्य संस्थानों का चयन

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत ने बताया कि राज्य में जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों का चयन किया जा रहा है। इस क्रम में प्रत्येक जिले में 38 स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल स्तर पर 101 संस्थान, और प्रत्येक प्रखंड से एक आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को एनक्यूएएस प्रमाणन के लिए चुना गया है। कुल 534 स्वास्थ्य संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

जल्द ही बढ़ेगी सर्टिफाइड संस्थानों की संख्या

वर्तमान में बिहार में 25 राष्ट्रीय और 64 राज्य स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान एनक्यूएएस प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं। साथ ही 35 और स्वास्थ्य संस्थानों को जल्द ही यह प्रमाणन दिया जाएगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों, सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) और अन्य पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे अपने-अपने संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक कदम उठा सकें।

गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किन मानकों पर हो रहा है काम

एनक्यूएएस प्रमाणन के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को सेवा प्रदायगी, मरीज संतुष्टि, क्लिनिकल सर्विसेज, संक्रमण नियंत्रण, सपोर्ट सर्विसेज, गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन और आउटपुट जैसे मानकों पर परखा जाता है। इन मानकों को पूरा करने से प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा और स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ेगी।

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स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा बड़ा बदलाव

राज्य सरकार की इस पहल से स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और मरीजों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। यह प्रयास न सिर्फ संस्थानों को प्रमाणित करने तक सीमित रहेगा, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर गुणवत्ता बनाए रखने का भी मार्ग प्रशस्त होगा। उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर 2025 तक स्वास्थ्य संस्थानों में क्रांतिकारी सुधार होगा और प्रदेश में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा।