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Bengaluru: बेंगलुरु में किराए पर घर लेना हुआ मुश्किल, जानिए क्यों?

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Bengaluru: बेंगलुरु में किराए पर रहने वाले लोगों के लिए एक नई परेशानी सामने आ रही है।

Bengaluru: बेंगलुरु में किराए पर रहने वालों, खासकर पीजी (PG) में रह रहे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई पीजी संचालक अब किराया कैश में मांग रहे हैं। अगर किरायेदार ऑनलाइन पेमेंट (Online Payment) करना चाहते हैं, तो उन्हें किराए की रकम पर 12% जीएसटी अतिरिक्त देना होगा, जिससे कुल किराया बढ़ जाएगा। पढ़िए पूरी खबर…

रेडिट पोस्ट ने खींचा ध्यान

हाल ही में रेडिट यूजर ‘SKDgeek’ ने बेंगलुरु के एक पीजी में लगे नोटिस की तस्वीर साझा की, जिसमें लिखा था, ‘किराया केवल नकद में देना होगा, ऑनलाइन भुगतान पर 12% जीएसटी लगेगा।’ यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और अब तक 30 हजार से अधिक बार देखी जा चुकी है। नेटिजन्स ने इस मामले को टैक्स चोरी का उदाहरण बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि किरायेदारों को यूपीआई से भुगतान कर जीएसटी बिल मांगना चाहिए, जिसे पीजी संचालक मना नहीं कर सकते।

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जीएसटी का डर, नकद की मांग

बेंगलुरु में पहले भी दुकानदारों ने यूपीआई भुगतान स्वीकार करने से इनकार कर नकद में लेनदेन की मांग की थी। इसका कारण था जीएसटी अधिकारियों के छापे, जो डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड के आधार पर टैक्स की जांच करते हैं। अब पीजी संचालकों में भी यही डर देखा जा रहा है। डिजिटल भुगतान से जीएसटी के दायरे में आने और संभावित कार्रवाई से बचने के लिए वे किरायेदारों से नकद भुगतान की मांग कर रहे हैं।

नेटिजन्स की प्रतिक्रिया और टैक्स चोरी की आशंका

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। कई यूजर्स ने इसे टैक्स चोरी का स्पष्ट मामला बताया और सरकार से शिकायत के लिए एक समर्पित नंबर शुरू करने की मांग की। एक यूजर ने लिखा, ‘सैलरीपेशा लोग टैक्स देते हैं, लेकिन ऐसे लोग नकद लेनदेन कर टैक्स से बचते हैं।’ कुछ ने सुझाव दिया कि किरायेदारों को जीएसटी बिल की मांग करनी चाहिए ताकि पीजी संचालकों को टैक्स देना पड़े। इस मामले ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों पर भी सवाल उठाए हैं।

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किरायेदारों के लिए बढ़ी चुनौती

यह नया नियम बेंगलुरु (Bangalore) में पहले से ही महंगे किराए के बीच किरायेदारों के लिए नई चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीजी संचालकों को जीएसटी देना अनिवार्य हुआ, तो किराए में 10-12% की वृद्धि हो सकती है, जिसका बोझ किरायेदारों पर पड़ेगा। इस स्थिति ने बेंगलुरु के पीजी और सह-आवासीय सुविधाओं में रहने वालों के लिए आवास को और महंगा कर दिया है।