Asha Bhosle Death: भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर गायिका आशा भोसले (Famous Singer Asha Bhosle) का रविवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन
जानकारी के मुताबिक, आशा भोसले (Asha Bhosle) को कार्डियक अरेस्ट के बाद शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में शोक की लहर है।

आवाज़ जो हमेशा जवान रही
आशा भोसले की आवाज़ दशकों तक हिंदी सिनेमा में गूंजती रही। ‘नया दौर’, ‘तीसरी मंज़िल’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘उमराव जान’, ‘इजाज़त’ और ‘रंगीला’ जैसी फिल्मों में उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। बदलते दौर और पीढ़ियों के बावजूद उनकी आवाज़ हमेशा युवा बनी रही।
संघर्ष भरा रहा जीवन
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। महज 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और गाने की शुरुआत की। 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी कर ली, जिसके चलते परिवार में मतभेद भी पैदा हुए। ससुराल में उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
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आलोचना से रिकॉर्ड तक का सफर
शुरुआती दौर में उनकी आवाज़ को लेकर आलोचना भी हुई। 1947 में संगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उन्हें ‘बेकार’ कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से संगीत जगत में अलग पहचान बनाई। उन्होंने 14 भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत गाए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
आशा भोसले ने बाद में संगीतकार आरडी बर्मन से विवाह किया। दोनों की जोड़ी ने ‘दम मारो दम’ जैसे कई यादगार गीत दिए।

संगीत के साथ कुकिंग का हुनर
संगीत के अलावा, आशा भोसले अपने कुकिंग टैलेंट के लिए भी जानी जाती थीं। उनके ‘Asha’s’ नाम से रेस्टोरेंट्स दुबई और कुवैत सहित कई देशों में मौजूद हैं।
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उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ से हिंदी सिनेमा में पदार्पण, 1997 में ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकन, वर्ष 2000 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण सम्मान शामिल हैं।
8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में संगीत की दुनिया को अनगिनत अमर गीत दिए। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत ने एक युग का अंत देख लिया है।
