Bihar News: विश्व संगीत दिवस के अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय नृत्य कला मंदिर के हरि उप्पल प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला परंपरा का उत्सव मनाया गया।
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी, संयुक्त सचिव महमूद आलम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
संगीत को बताया भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर
अपने संबोधन में मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि संगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो भाषा, क्षेत्र और सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिहार की समृद्ध संगीत परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
संगीत समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि संगीत जीवन में संवेदनशीलता, सकारात्मकता और रचनात्मकता का संचार करता है। उन्होंने कहा कि संगीत समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का प्रभावी माध्यम है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ती है संगीत परंपरा
कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि भारतीय संगीत परंपरा हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती है।
शिव स्तुति से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज कथक विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत शिव स्तुति से हुआ। कथक शिक्षक कुमार कृष्ण किशोर के निर्देशन में दी गई इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तबला और बांसुरी की जुगलबंदी ने बांधा समां
कार्यक्रम में शांतनु राय और मोहम्मद सलीम द्वारा तबला और बांसुरी की मनमोहक जुगलबंदी प्रस्तुत की गई। सुर और ताल के इस संगम ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
भोजपुरी झूमर ने बिखेरा लोक संस्कृति का रंग
लोकगीत विभाग के कलाकारों ने मनोरंजन ओझा के निर्देशन में भोजपुरी झूमर प्रस्तुत किया। “मोरी झुलनियां के छइयां…” और “अमुआ मड़ुआ के झूमि डलरिया…” जैसे लोकगीतों ने पूरे सभागार को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।
शास्त्रीय और सुगम संगीत की शानदार प्रस्तुति
संगीत रचना विभाग के छात्र-छात्राओं ने अशोक कुमार प्रसाद के निर्देशन में शास्त्रीय और सुगम संगीत की प्रस्तुति दी। वहीं वाद्य संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने तबला वादन से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
गिटार की धुनों ने जीता दर्शकों का दिल
गिटार विभाग के विद्यार्थियों ने राकेश कुमार रंजन के निर्देशन में लोकप्रिय फिल्मी धुनों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में आधुनिक संगीत का रंग भी घोला। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।
राग और भजन की प्रस्तुति से हुआ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में शास्त्रीय गायन विभाग के विद्यार्थियों हिताक्ष और हर्ष ने राग आधारित ख्याल गायन प्रस्तुत किया। इसके बाद मीरा भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया और दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कलाकारों और विद्यार्थियों को मिला सम्मान
कार्यक्रम का समग्र निर्देशन डॉ. बम कुमारी मिश्रा ने किया। अंत में संयुक्त सचिव महमूद आलम ने सभी कलाकारों, प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला प्रेमी, शिक्षक, विद्यार्थी और दर्शक उपस्थित रहे।
संगीत के माध्यम से संस्कृति का उत्सव
विश्व संगीत दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल संगीत और कला का उत्सव बना, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम साबित हुआ।
