Punjab News: चंडीगढ़, 7 जून। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने पहले ही आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है और अब रसोई गैस के दाम बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी पर जताई चिंता
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम परिवारों की रसोई को प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भी कई बार वृद्धि की जा चुकी है, जिसका असर छोटे कारोबारियों, ढाबा संचालकों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्थानीय खाद्य व्यवसायों पर पड़ा है। अब घरेलू गैस महंगी होने से परिवारों के मासिक खर्च में और बढ़ोतरी होगी।
डीजल, सीएनजी और जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़े
वित्त मंत्री ने कहा कि देशभर में डीजल, सीएनजी और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके कारण आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी महंगी होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में असफल रही है और जनता को राहत देने के बजाय लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात को बहाना बना रही सरकार
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और वैश्विक तनावों का हवाला देकर तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को सही ठहराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को राहत देने के बजाय महंगाई का बोझ उन पर डाल रही है। उनके अनुसार, भाजपा ने सत्ता में आने से पहले महंगाई कम करने और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में राहत देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इन वादों को पूरा नहीं किया गया।
बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग
चीमा ने कहा कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का असर आम नागरिकों की क्रय शक्ति पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से एलपीजी सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लेने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि तेल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतें देश के लाखों परिवारों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही हैं। ऐसे में सरकार को जनता पर बोझ बढ़ाने के बजाय राहत देने वाली नीतियों पर काम करना चाहिए।

