Passport: दुनिया के हर व्यक्ति को किसी देश की सीमा पार करने के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरूरत होती है।
Passport: दुनिया के हर व्यक्ति को किसी देश की सीमा पार करने के लिए पासपोर्ट (Passport) और वीजा की जरूरत होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर ऐसे तीन लोग हैं जिन्हें किसी भी देश में जाने के लिए न तो पासपोर्ट चाहिए, न ही वीजा (Visa) की जरूरत होती है। ये तीनों शख्सियतें (Personalities) इतनी खास हैं कि उनके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों में विशेष प्रावधान किए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें न अमेरिका के राष्ट्रपति, न रूस के राष्ट्रपति और न ही भारत के प्रधानमंत्री शामिल हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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कौन हैं ये तीन लोग जिन्हें मिली है पासपोर्ट-फ्री आजादी?
दुनिया में केवल तीन ऐसे लोग हैं जो बिना पासपोर्ट (Passport) के किसी भी देश की सीमा पार कर सकते हैं- ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III (King Charles III), जापान के सम्राट नारुहितो (Emperor Naruhito) और उनकी पत्नी महारानी मासाको (Empress Masako)। ये तीनों अपने-अपने देशों के प्रतीकात्मक शासक हैं और इन्हें यह अधिकार संवैधानिक व्यवस्था के तहत मिला है।

ब्रिटेन में किंग चार्ल्स III को कैसे मिला यह विशेषाधिकार?
ब्रिटेन में यह परंपरा सदियों पुरानी है। यहां सभी ब्रिटिश पासपोर्ट ‘हिज माजेस्टी पासपोर्ट’ यानी राजा के नाम से जारी होते हैं। इसलिए किंग चार्ल्स III को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती क्योंकि वे ही इसके जारीकर्ता हैं। यही विशेषाधिकार पहले क्वीन एलिजाबेथ II के पास भी था। उन्होंने अपने पूरे शासनकाल में कभी पासपोर्ट नहीं रखा। 2023 में चार्ल्स के ताजपोशी के बाद यह परंपरा आगे बढ़ी।
जापान के सम्राट और महारानी क्यों नहीं रखते पासपोर्ट?
जापान में भी यही व्यवस्था लागू है। वहां के संविधान के मुताबिक सम्राट नारुहितो (Emperor Naruhito) और महारानी मासाको (Masako) देश के प्रतीकात्मक शासक हैं। इसलिए जापानी सरकार उन्हें पासपोर्ट जारी नहीं करती। 2019 में जब सम्राट नारुहितो ने अपना पहला विदेशी दौरा ब्रिटेन में किया था, तो वे बिना किसी दस्तावेज के पहुंचे थे और उनका भव्य स्वागत हुआ था।
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सिर्फ पासपोर्ट नहीं, मिलती हैं कई अन्य विशेष सुविधाएं भी
इन तीनों शाही हस्तियों को डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी (Diplomatic Immunity) भी प्राप्त है। इसका मतलब है कि किसी भी देश में उन्हें न तो गिरफ्तार किया जा सकता है, न ही किसी कानूनी जांच में फंसाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, 2024 में जब महारानी मासाको यूरोप गईं, तो फ्रांस ने उन्हें बिना वीजा प्रक्रिया के प्रवेश दिया। वहीं ऑस्ट्रेलिया में किंग चार्ल्स III के आगमन पर रेड कार्पेट बिछाया गया।
क्या किसी और को मिलता है ऐसा विशेषाधिकार?
कई लोगों को लगता है कि शायद संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UN Secretary-General) को भी यह अधिकार होता होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। उन्हें laissez-passer नामक एक विशेष यात्रा दस्तावेज दिया जाता है, जो पासपोर्ट का ही एक रूप होता है। इसलिए, असली पासपोर्ट-फ्री विशेषाधिकार दुनिया में केवल इन तीन लोगों के पास है।
क्या भारत में भी ऐसा संभव है?
भारत में चाहे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) हों या पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi), सभी को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए डिप्लोमैटिक पासपोर्ट की जरूरत होती है और वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन, 2025 में जापान के सम्राट के भारत दौरे की चर्चा है और यदि वे आते हैं, तो वे दिल्ली में बिना पासपोर्ट उतरने वाले पहले विदेशी शासक होंगे। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की विशेष छूटें अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देती हैं।
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प्रोटोकॉल के ज़रिए सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन
टूरिज्म और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह के राजनयिक प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सॉफ्ट पावर को मजबूत करते हैं। लेकिन आम नागरिक के लिए ऐसी पासपोर्ट-फ्री आजादी सिर्फ एक सपना ही रह जाती है।
