Punjab News: Doaba क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बिस्त दोआब नहर के पुनर्जीवन से पंजाब में सिंचाई व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिली है। Bhagwant Mann सरकार के प्रयासों से वर्ष 2025-26 में बिस्त दोआब नहरी नेटवर्क के तहत सिंचाई क्षेत्र में 167 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
इस उपलब्धि के तहत करीब 1,10,762 एकड़ अतिरिक्त कृषि भूमि को नहरी सिंचाई के दायरे में लाया गया है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिला है।
19 हजार एकड़ जमीन को पहली बार मिला नहरी पानी
इस पुनर्जीवन अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि लगभग 19,213 एकड़ कृषि भूमि को पहली बार नहरी पानी उपलब्ध कराया गया।
अब तक इन क्षेत्रों के किसान भूमिगत जल और बारिश पर निर्भर थे, लेकिन नहरों के जरिए पानी पहुंचने से खेती आसान और अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
दोआबा के कई जिलों को मिला फायदा
बिस्त दोआब नहर नेटवर्क में जल प्रवाह बेहतर होने से Jalandhar, Kapurthala, Hoshiarpur और Shaheed Bhagat Singh Nagar के कई हिस्सों में सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है।
सरकार ने रोपड़ हेडवर्क्स से निकलने वाली मुख्य नहर, उसकी शाखाओं, माइनर और खालों का बड़े स्तर पर पुनरुद्धार किया है। इससे पानी का वितरण अधिक प्रभावी और सुचारू हुआ है।
कई क्षेत्रों में मजबूत हुआ सिंचाई ढांचा
जल प्रवाह में सुधार का फायदा बलाचौर क्षेत्र की काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना को भी मिला है।
इसके अलावा बंगा, मुकंदपुर, अपरा, नूरमहल, मलसियां, नकोदर, आदमपुर और कालासंघियां जैसे क्षेत्रों में भी सिंचाई ढांचे को मजबूत किया गया है। जालंधर ब्रांच से जुड़े पुनर्जीवित रजवाहों ने अंतिम खेत तक पानी पहुंचाने की क्षमता को और बेहतर बनाया है।
शहरी क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ
नहर पुनर्जीवन का असर अब शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। जालंधर शहर की पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए जालंधर ब्रांच को अतिरिक्त 150 क्यूसेक पानी आवंटित किया गया है।
इससे नगर निगम की भूमिगत जल पर निर्भरता कम होगी और शहर को अधिक भरोसेमंद जल आपूर्ति मिल सकेगी।
किसानों और जल संरक्षण दोनों को फायदा
पंजाब सरकार का कहना है कि यह पहल केवल सिंचाई बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संसाधनों के वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
नहरों के पुनर्जीवन से कृषि उत्पादन बढ़ने, किसानों की आय मजबूत होने और भूजल संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
