Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईआईटी रुड़की में आयोजित एका कार्यशाला को वर्चुअली (ऑनलाइन) संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में आपदा प्रबंधन कोई विकल्प नहीं है, बल्कि सरकार की प्राथमिकता है। इस बात का जिक्र उन्होंने वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और सुरक्षा बलों के सामने किया।
आपदा प्रबंधन राज्य के लिए महत्वपूर्ण है
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड में भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, भारी बारिश, हिमस्खलन तथा जंगल की आग जैसे आपदाओं का खतरा हमेशा रहता है। ऐसे में टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक तरीकों के साथ काम करना जरूरी है।
IIT रुड़की के शोध और तकनीक की प्रशंसा
मुख्यमंत्री ने आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ और एआई आधारित पूर्वानुमान तकनीक की सराहना की। उन्होंने भरोसा जताया कि उत्तराखंड सरकार शोध के परिणामों को सीधे जमीन पर लागू करेगी ताकि आपदा के समय पहले चेतावनी मिल सके और प्रभाव कम किया जा सके।
शोध संस्थान और नीति निर्माता मिलकर समाधान ढूँढ़ रहे हैं
कार्यशाला में त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान की भी भागीदारी रही। वैज्ञानिक, नीति निर्माता तथा सुरक्षा प्रबंधकों ने मिलकर आपदा जोखिम में लचीलापन और न्यूनीकरण पर सुझाव दिए और यह चर्चा की कि कैसे तकनीक, समुदाय और प्रशासन मिलकर काम कर सकते हैं।
तकनीक और समुदाय को जोड़ने की आवश्यकता
धामी ने कहा कि आपदाओं से निपटना सिर्फ सरकार या किसी विभाग का काम नहीं है, बल्कि समुदाय, प्रशासन, विज्ञान और तकनीक सभी का संयुक्त प्रयास होना चाहिए। इससे आपदा में कमी और बचाव कार्य दोनों बेहतर ढंग से हो सकते हैं।
