UP News: Yogi Adityanath की सरकार उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी कृषि मॉडल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। स्मार्ट कृषि, आधुनिक तकनीक, बाजार-उन्मुख नीतियों और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं के जरिए प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को सतत, उच्च-मूल्य और निर्यात-उन्मुख कृषि का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए कृषि उत्पादन, सिंचाई, निर्यात, जैविक खेती और तकनीकी नवाचार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
कृषि निर्यात में यूपी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने की तैयारी
योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार का उद्देश्य अनाज, दलहन और तिलहन की उत्पादकता को कई गुना बढ़ाना है। साथ ही फसल तीव्रता को 250 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 4 प्रतिशत से नीचे लाने की योजना बनाई गई है।
सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय कृषि निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाना भी है। इसके लिए किसानों को बेहतर बाजार, गुणवत्ता सुधार और निर्यात मानकों के अनुसार उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश आज खाद्यान्न, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। कृषि क्षेत्र में राज्य का योगदान लगातार बढ़ रहा है और कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) के मामले में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है।
वर्तमान में प्रदेश का कृषि सकल मूल्य वर्धन लगभग 4.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो राज्य की जीएसवीए का करीब 15.7 प्रतिशत है।
2017 से 2025 के बीच कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड वृद्धि
योगी सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 के बीच कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
इस दौरान—
- गेहूं उत्पादन में 16 प्रतिशत वृद्धि
- अनाज उत्पादन में 17 प्रतिशत वृद्धि
- तिलहन उत्पादन में 34 प्रतिशत वृद्धि
- दलहन उत्पादन में 26 प्रतिशत वृद्धि
दर्ज की गई है।
इसके अलावा कृषि निर्यात में भी 2.13 गुना बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कृषि निर्यात बढ़कर लगभग 7,139 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
सिंचाई और फसल विविधीकरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई सुविधाओं और फसल विविधीकरण को भी प्राथमिकता दी है। सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के विस्तार से किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन का लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं तिलहन क्षेत्रफल में 141 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा दलहन उत्पादन में 17 प्रतिशत और अनाज उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
स्मार्ट कृषि और ड्रोन तकनीक को मिल रहा बढ़ावा
योगी सरकार खेती को आधुनिक बनाने के लिए ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि सेवाएं, जैविक खेती और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रही है।
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित खेती से उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में सुधार होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को बाजार, मौसम और कृषि संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
यूपी एग्रीज परियोजना से पिछड़े क्षेत्रों को फायदा
विश्व बैंक समर्थित “यूपी एग्रीज परियोजना” भी राज्य के कृषि विकास मॉडल का अहम हिस्सा बन रही है। लगभग 325 मिलियन डॉलर की इस परियोजना के जरिए पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जिलों में कृषि और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, आधुनिक तकनीकों का विस्तार करना और कृषि उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि सुनिश्चित करना है। इससे पिछड़े क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
2047 तक वैश्विक कृषि हब बनने की तैयारी
योगी सरकार का कहना है कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, निर्यात बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रमुख कृषि केंद्रों में शामिल हो सकता है।
सरकार “स्मार्ट कृषि” और “आधुनिक खेती” के जरिए प्रदेश को 2047 तक वैश्विक कृषि हब बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
