UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के सबसे आकर्षक टेक्सटाइल निवेश केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। उद्योगों के अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रोत्साहन व्यवस्था और आधुनिक औद्योगिक ढांचे के कारण प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसी विजन को देश और दुनिया के निवेशकों के सामने रखने के लिए भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 में उत्तर प्रदेश विशेष सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
टेक्सटाइल नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई रफ्तार
राकेश सचान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सदियों से हथकरघा और वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रदेश के करीब 1.91 लाख हथकरघा बुनकर अपनी कला और कौशल से देश-विदेश में पहचान बना चुके हैं। बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन, सीतापुर की दरी और मेरठ-बागपत के होम टेक्सटाइल उत्पाद आज वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक वस्त्र उद्योग के साथ-साथ प्रदेश तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) और आधुनिक गारमेंटिंग सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत निवेशकों को कई आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, जिससे निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति मिल रही है।
बुनकरों के लिए सरकार चला रही कई योजनाएं
मंत्री ने बताया कि सरकार बुनकरों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश के हजारों हथकरघा बुनकरों को बिजली बिल पर सब्सिडी दी जा रही है। उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। वहीं, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHT), वाराणसी के छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और उद्यमियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।
पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
स्टांप, शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध वस्त्र परंपरा आधुनिक औद्योगिक नीतियों के साथ नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने वाराणसी की बनारसी सिल्क साड़ी, भदोही और मिर्जापुर के कालीन तथा लखनऊ की चिकनकारी को प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार इन पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
निवेशकों को दिखाई गई यूपी की संभावनाएं
कार्यक्रम में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के आयुक्त एवं निदेशक के. विजयेंद्र पांडियन ने स्वागत भाषण दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 और निवेश की संभावनाओं पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रेरणा शर्मा ने निवेश प्रोत्साहन नीतियों और उद्योगों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। वहीं, प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर ने सरकार की औद्योगिक प्रतिबद्धता और टेक्सटाइल सेक्टर की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उद्योगपति ललित ठकराल और रजत जयपुरिया ने उत्तर प्रदेश में निवेश के अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए।
उद्योगों को मिले लेटर ऑफ कम्फर्ट और वित्तीय सहायता
कार्यक्रम के दौरान टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत लाभान्वित चार औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए गए। इसके अलावा चार अन्य इकाइयों को वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए गए। सरकार का कहना है कि वह केवल निवेश आमंत्रित नहीं कर रही, बल्कि समयबद्ध वित्तीय सहायता देकर निवेशकों का भरोसा भी मजबूत कर रही है।
यूपी पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र
भारत मंडपम के हॉल-11 में लगाए गए उत्तर प्रदेश पवेलियन में प्रदेश के पारंपरिक और आधुनिक वस्त्र उत्पादों, टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022, पीएम मित्र पार्क और उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का प्रदर्शन किया गया। यहां निवेशकों और उद्यमियों को प्रदेश की औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
टेक्सटाइल हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश
प्रदेश सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल पारंपरिक वस्त्र उत्पादन का केंद्र बनाना नहीं, बल्कि निवेश, विनिर्माण, निर्यात और रोजगार का राष्ट्रीय ग्रोथ इंजन बनाना है। भारत टेक्स-2026 में उत्तर प्रदेश की मजबूत मौजूदगी इस बात का संकेत है कि राज्य अब देश के प्रमुख टेक्सटाइल निवेश और विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
