UP News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “गो संरक्षण से समृद्धि” मॉडल ने अब एक स्थानीय पहल से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान हासिल कर ली है। इस मॉडल के तहत देशी गायों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक उपयोग और उनसे जुड़े उत्पादों के माध्यम से एक मजबूत एथिकल डेयरी इकोसिस्टम विकसित किया गया है। यह पहल अब केवल पशुपालन या गोसेवा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एक संगठित आर्थिक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
1000 से अधिक देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका “एथिकल डेयरी सिस्टम” है, जिसमें 1000 से अधिक देशी गायों को संरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से पाला जा रहा है। इसमें साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय नस्लों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन गायों के दूध, गोबर और गोमूत्र के उपयोग से न केवल डेयरी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, बल्कि उन्हें एक पूर्ण संसाधन श्रृंखला के रूप में विकसित किया गया है, जिससे शून्य-वेस्ट मॉडल को भी बढ़ावा मिल रहा है।
150 से अधिक उत्पाद, 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार
इस गो-आधारित मॉडल से जुड़े उद्यम के जरिए करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, हर्बल चाय, ऑर्गेनिक कुकीज, लड्डू, स्किन-केयर और हेयर-केयर उत्पाद, तथा गोमूत्र आधारित आयुर्वेदिक अर्क शामिल हैं। इन उत्पादों की मांग न केवल भारत में, बल्कि अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य देशों में तेजी से बढ़ रही है। इस पूरी व्यवस्था से लगभग 10 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार खड़ा हुआ है, जो लगातार विस्तार की ओर है।

अमेरिका से लौटे इंजीनियर ने शुरू किया मिशन
इस मॉडल की शुरुआत गाजियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने की, जो 14 वर्षों तक अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य कर चुके हैं। विदेशों में काम करने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से भारत लौटकर गो संरक्षण और देसी गाय आधारित आर्थिक मॉडल को विकसित करने का निर्णय लिया। वर्तमान में यह पहल लगभग 100 लोगों की टीम के माध्यम से संचालित हो रही है, जो इसे एक संगठित स्टार्टअप और सामाजिक उद्यम दोनों के रूप में आगे बढ़ा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भी मिला सम्मान और गोपूजन

इस मॉडल की साहीवाल नस्ल की संरक्षित गायों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस प्रणाली से संरक्षित गायों का गोपूजन और आरती की जा चुकी है, जिससे इस पहल को नीतिगत और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिली है। इससे यह मॉडल केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों से भी जुड़ गया है।
वृद्ध गोवंश को भी बनाया गया संरक्षण मॉडल का हिस्सा
इस गो संरक्षण प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें वृद्ध और अनुपयोगी मानी जाने वाली गायों को भी संरक्षित किया जाता है। इन्हें बोझ नहीं, बल्कि गो-परिवार का हिस्सा माना जाता है। इनके लिए अलग देखभाल व्यवस्था, आहार और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे यह मॉडल मानवीय दृष्टिकोण के साथ स्थायित्व (sustainability) को भी मजबूत करता है।

सरकारी नीतियों से मिला मजबूत समर्थन
राज्य सरकार ने इस मॉडल को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत और वित्तीय सहायता योजनाएं लागू की हैं। “ऑपरेशन-4” के तहत देसी गाय पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिसमें 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी का स्पष्ट ढांचा शामिल है। इससे छोटे और मध्यम किसान भी इस मॉडल का हिस्सा बन रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गो-इकोनॉमी को नई दिशा
इस मॉडल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। अब किसान केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि देशी गाय आधारित डेयरी और प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। गो-इकोनॉमी मॉडल को अब उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक डेयरी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में और अधिक विस्तार की संभावनाएं रखता है।
