'Ready for both war and peace...', Iranian Foreign Minister Araghchi on Aaj Tak, watch exclusive interview

‘युध्द और शांति दोनों के लिए तैयार…’, India Today पर ईरानी विदेश मंत्री अराघची, देखें Exclusive इंटरव्यू

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India Today: देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार India Today ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ तेहरान से एक विशेष और अहम इंटरव्यू किया है। यह बातचीत ऐसे समय में सामने आई है जब मिडिल ईस्ट में हालात संवेदनशील हैं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति नए मोड़ पर खड़ी है।

तनावपूर्ण वैश्विक पृष्ठभूमि में खास बातचीत

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह इंटरव्यू प्रसारित हुआ। दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता का तीसरा दौर Geneva में प्रस्तावित है। ऐसे माहौल में तेहरान से सीधे प्रसारित यह बातचीत कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान युद्ध और शांति — दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है। हालांकि उनका जोर इस बात पर रहा कि उनका उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि सम्मानजनक और न्यायपूर्ण समझौता है।

इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची की ओर से कुछ अहम बिंदु सामने आए जिसमें ये कहा गया है कि

  • ईरान किसी भी संभावित युद्ध की स्थिति के प्रति सतर्क है, लेकिन प्राथमिकता शांति प्रयासों को दी जा रही है।
  • ईरानी सेना अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है, पर उसका लक्ष्य संघर्ष नहीं है।
  • ईरान ने दोहराया कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह नाभिकीय हथियार बनाने की दिशा में नहीं बढ़ रहा।
  • यदि वार्ता में वास्तविक इरादा और पारदर्शिता दिखाई जाती है, तो संतुलित और निष्पक्ष समझौता संभव है।

क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक चिंता

विदेश मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई बड़ा संघर्ष शुरू होता है, तो उसका प्रभाव पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है। वर्तमान समय में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने से तनाव और गहरा गया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे हालात में एक छोटी चिंगारी भी व्यापक टकराव का रूप ले सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

भारत-ईरान संबंधों का संदर्भ

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग, रणनीतिक संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहा है।

पिछले वर्ष दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत में क्षेत्रीय तनाव, सहयोग और नागरिकों की सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। यह निरंतर संवाद इस बात का संकेत है कि दोनों देश संबंधों को संतुलित और रचनात्मक दिशा में बनाए रखना चाहते हैं।

कुल मिलाकर तेहरान से किया गया यह विशेष इंटरव्यू न केवल मिडिल ईस्ट की जटिल राजनीति को समझने का अवसर देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तनाव के बीच संवाद की संभावना अब भी जीवित है।

जहां एक ओर युद्ध की आशंकाएं मंडरा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की राह भी खुली है। अब नजरें जिनेवा में होने वाली आगामी वार्ता पर टिकी हैं।