Punjab News: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय बजट 2026 पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया है, जिससे किसान-हितैषी होने के उसके दावों की सच्चाई सामने आ गई है।
एमएसपी और मंडी व्यवस्था पर कोई ठोस कदम नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर कोई स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है। साथ ही कृषि आधारभूत ढांचा फंड में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। मंडी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी किसी तरह की ठोस सहायता नहीं दी गई, जिससे कृषि प्रधान राज्यों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है।
देश का पेट भरने वाले किसानों की अनदेखी
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब का किसान पूरे देश का पेट भरता है, इसके बावजूद केंद्र सरकार उन व्यवस्थाओं में निवेश नहीं कर रही जो देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि बजट में नारियल, काजू, चंदन और ड्राई फ्रूट्स जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों का जिक्र किया गया, लेकिन उत्तर भारत के किसानों के लिए कोई योजना नहीं लाई गई, जो अपनी जलवायु के अनुसार खेती करते हैं।
कृषि सब्सिडी और आम आदमी पर बढ़ता बोझ
वित्त मंत्री ने कहा कि यूरिया सब्सिडी को पिछले साल के 1,26,475 करोड़ रुपये से घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट आम आदमी को कोई राहत नहीं देता। महंगाई बढ़ रही है, आय नहीं बढ़ रही और टैक्स में भी कोई राहत नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे आम निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लंबी अवधि के पूंजी लाभ पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।
रक्षा बजट और विश्वकर्मा योजना पर निराशा
रक्षा बजट को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए रक्षा उत्पादन और बजट में ठोस बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री के भाषण में रक्षा का जिक्र केवल चार बार हुआ।
उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इस योजना का बजट 5,100 करोड़ रुपये से घटाकर 3,861 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि इसे पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों के लिए महत्वपूर्ण योजना बताया गया था।
राज्यों के अधिकार और वित्त आयोग पर सवाल
वित्त मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग में राज्यों के टैक्स हिस्से यानी वर्टिकल डिवोल्यूशन को 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है। राज्यों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि पंजाब को कोई वित्तीय घाटा अनुदान नहीं दिया गया और एसडीआरएफ की शर्तें भी बहुत सीमित रखी गई हैं, जिससे आपदा प्रबंधन में कठिनाई आएगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य में भी उम्मीदों पर पानी
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि शिक्षा बजट में केवल लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जो बेहद निराशाजनक है। पीएम-श्री योजना के लिए भी पिछले साल जितना ही बजट रखा गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। स्वच्छ भारत मिशन का बजट पिछले साल के मुकाबले आधा कर दिया गया है।
पंजाब और उत्तर भारत की पूरी तरह अनदेखी
वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि इस बजट में दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी भारत पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, जबकि पंजाब और पूरे उत्तर भारत को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में न किसानों के लिए कुछ है, न युवाओं के लिए नौकरियां और न ही राज्यों की आर्थिक मजबूती के लिए कोई ठोस योजना।
