Punjab News: पंजाब सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पाठ्य-पुस्तकों के वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है।
अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से Punjab School Education Board (PSEB) से संबद्ध निजी स्कूलों के कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को किताबें सीधे तौर पर बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।
किताबों के वितरण में एकाधिकार खत्म, पारदर्शिता बढ़ेगी
इस नई व्यवस्था के तहत अधिकृत एजेंसियों और किताब बेचने वाली दुकानों का एकाधिकार समाप्त किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने कहा कि इस सुधार से किताबों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और अभिभावकों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छपी हुई कीमत से अधिक कोई शुल्क न लिया जाए, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ होने वाली ओवरचार्जिंग की समस्या खत्म हो सके।
अब परिवारों को सीधे मिलेगी 15% की छूट
सरकार के इस फैसले से निजी स्कूलों के 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पहले जो 15% छूट किताब विक्रेताओं को मिलती थी, अब वही छूट सीधे तौर पर विद्यार्थियों और उनके परिवारों को दी जाएगी।
इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने में मदद मिलेगी।
ई-पोर्टल और मोबाइल ऐप से होगी किताबों की ऑनलाइन बुकिंग
नई प्रणाली को आसान और प्रभावी बनाने के लिए PSEB ने एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल भी तैयार किया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- विद्यार्थी या अभिभावक ऑनलाइन किताबों का ऑर्डर कर सकेंगे
- स्कूल कक्षा-वार और विषय-वार आवश्यकताओं को डिजिटल रूप में अपलोड करेंगे
- हर विद्यार्थी को व्यक्तिगत लॉगिन क्रेडेंशियल्स प्रदान किए जाएंगे
- सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से पारदर्शी लेन-देन सुनिश्चित होगा
समय पर डिलीवरी और जवाबदेही पर जोर
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, प्राप्त ऑर्डरों के आधार पर क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा किताबों के बंडल तैयार किए जाएंगे और समय पर स्कूलों तक पहुंचाए जाएंगे।
स्कूलों को एक लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि वे नई नीति का पालन करेंगे और निर्धारित कीमत से अधिक कोई अतिरिक्त राशि नहीं वसूलेंगे।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, विद्यार्थियों की लूट पर रोक लगेगी और समय पर किताबें उपलब्ध कराना संभव होगा।
