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Punjab: डॉ. बलबीर सिंह ने कपूरथला और अमृतसर के लिए ‘महिला नशा उपयोगकर्ताओं के लिए एकीकृत एकल विंडो कार्यक्रम’ किया लॉन्च

पंजाब राजनीति
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा पायलट चरण की सफलता के बाद यह कार्यक्रम सभी जिलों में किया जाएगा विस्तारित

यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग और पंजाब पुलिस के संयुक्त सहयोग से संचालित होगा

Punjab News: महिलाओं के नशा उपयोग से संबंधित विशेष चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए और पंजाब सरकार के चल रहे नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ के तहत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सोमवार को ‘महिलाओं के लिए एकीकृत एकल विंडो कार्यक्रम’ को कपूरथला और अमृतसर जिलों के लिए पहले चरण के रूप में लॉन्च किया। यह कार्यक्रम पंजाब स्वास्थ्य विभाग और पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन के बीच संयुक्त सहयोग का परिणाम है।

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इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम को “पंजाब मॉडल फॉर विमेन ड्रग यूज़र्स” के नाम से जाना जाएगा और इसका उद्देश्य महिलाओं को राज्यभर में समग्र और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम यह स्वीकार करता है कि महिलाएं पुरुषों से भिन्न चुनौतियों का सामना करती हैं — जैसे कि नशे की अलग प्रवृत्तियाँ, अधिक ओवरडोज़ मृत्यु दर, और उपचार के बाद पुनः नशा करने की अधिक संभावना।”

कपूरथला में हुए सफल पायलट प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 241 महिला नशा उपयोगकर्ताओं को इस योजना के तहत पंजीकृत किया गया, जिन्हें व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, स्त्रीरोग जांच, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल, हानि में कमी (harm reduction) सेवाएं, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच और उपचार, टीबी देखभाल, यौन संचारित रोगों (STI) का उपचार और परामर्श शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 81 महिलाओं को ओओएटी (OOAT) क्लीनिक से जोड़ा गया और 80 महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया। उल्लेखनीय है कि पंजीकृत चार गर्भवती महिलाओं में से तीन ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है।

संवेदनशील पुनर्वास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “नशा एक बीमारी है, अपराध नहीं। हमें पीड़ितों के साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिए और उन्हें सम्मानपूर्वक पुनः समाज में शामिल करने के लिए कौशल देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपने परिवार के नशा पीड़ित सदस्यों को पुनर्वास सेवाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम के कार्यान्वयन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कपूरथला मॉडल राज्य में प्रशिक्षण और सीखने का केंद्र बनेगा। पहले चरण में पायलट आधार पर इसे कपूरथला और अमृतसर जिलों में लागू किया जा रहा है, और पायलट की सफलता के आधार पर यह पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा।

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स्वास्थ्य विभाग और पंजाब पुलिस के बीच इस साझेदारी की पहल का स्वागत करते हुए, कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ ने कहा कि महिला नशा उपयोगकर्ता सामाजिक कलंक और अस्वीकृति के कारण उपचार के लिए आगे आने से कतराती हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में महिलाओं के लिए समर्पित उपचार सेवाएं लगभग नहीं के बराबर हैं। यह पहल महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की इस कमी को दूर करने का प्रयास है। उन्होंने जानकारी दी कि अमृतसर और कपूरथला में इस पायलट प्रोजेक्ट को कम्युनिटी पुलिसिंग इनिशिएटिव के तहत पंजाब पुलिस का कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन फंड करेगा।

यह सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह सिर्फ नशे की आपूर्ति और मांग के चक्र को तोड़ना ही नहीं चाहती, बल्कि अपने नागरिकों के लिए एक स्वस्थ भविष्य भी सुनिश्चित करना चाहती है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कुमार राहुल, निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. हितिंदर कौर, उप निदेशक डॉ. रोहिणी गोयल और मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डॉ. संदीप भोला भी उपस्थित थे।