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Punjab News: दब चुकी नहरों को फिर से शुरू करने का दावा, बलतेज पन्नू ने गिनाईं उपलब्धियां

पंजाब
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Punjab News: पंजाब और राजस्थान के बीच पानी को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के हालिया दावों के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि राजस्थान पर पंजाब का 1.44 लाख करोड़ रुपये बकाया है, जिस पर विपक्षी दलों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।

क्या है पूरा मामला

आम आदमी पार्टी के नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि 1920 के समझौते के तहत राजस्थान को मिलने वाले पानी के बदले पंजाब का भारी वित्तीय बकाया बनता है। उनका दावा है कि यह रकम करीब 1,44,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए पंजाब के हितों की अनदेखी की।

विपक्ष पर तीखा हमला

पन्नू ने खास तौर पर सुनील जाखड़ पर हमला बोलते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को ‘शगूफा’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने पंजाब के पानी और संसाधनों को अन्य राज्यों के हित में इस्तेमाल होने दिया, जिससे राज्य को नुकसान हुआ।

यह बयान सियासी माहौल को और गर्म कर रहा है और आने वाले समय में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

नहरी पानी को लेकर सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नहरी पानी की उपलब्धता में बड़ा सुधार हुआ है। जहां पहले केवल 22 प्रतिशत पानी ही खेतों तक पहुंचता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इस बदलाव को सरकार अपनी नीतियों और प्रयासों का परिणाम बता रही है, जबकि विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है।

पुरानी नहरों का पुनर्जीवन

सरकार द्वारा बंद पड़ी और दब चुकी नहरों को फिर से शुरू करने का काम भी किया जा रहा है। तरनतारन के सरहाली क्षेत्र में ‘लंबी नहर’ को पुनर्जीवित करना इसी दिशा में एक बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को मजबूत करना और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान करना है।

सियासी टकराव और आगे की राह

यह मुद्दा अब केवल पानी या आर्थिक बकाया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। आम आदमी पार्टी जहां इसे पिछली सरकारों की विफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान निकलता है या यह केवल सियासी बहस तक ही सीमित रहता है।

पंजाब-राजस्थान पानी विवाद एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़ा हुआ है। भगवंत सिंह मान सरकार के दावों और विपक्ष के सवालों के बीच सच्चाई क्या है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में एक बड़ा विषय बन चुका है और इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।