Punjab News: पंजाब सरकार ने किसानों को धान की फसल से हटाकर फसली विविधीकरण की ओर बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने खरीफ मक्का विविधीकरण योजना को अब 6 जिलों से बढ़ाकर 16 जिलों तक लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
धान से मक्का की ओर बढ़ावा
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि यह निर्णय पिछले साल के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद लिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान की अधिक पानी खपत वाली फसल से हटाकर मक्का जैसी कम पानी वाली फसल की ओर प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि यह कदम पंजाब में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए बेहद जरूरी है और इसे एक “निर्णायक पहल” माना जा रहा है।
50,000 एकड़ क्षेत्र में मक्का की खेती का लक्ष्य
इस योजना के तहत राज्य के 16 जिलों में करीब 20,000 हेक्टेयर (लगभग 50,000 एकड़) क्षेत्र को खरीफ मक्का के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अमृतसर, बठिंडा, लुधियाना, पटियाला, जालंधर सहित कई प्रमुख जिले शामिल हैं।
कैसे मिलेगी सब्सिडी?
सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये की सब्सिडी देगी।
- 4,500 रुपये इनपुट लागत के बिल जमा करने पर दिए जाएंगे
- बाकी 13,000 रुपये फसल के सत्यापन के बाद दो किस्तों में मिलेंगे
यह राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल
सरकार ने इस योजना को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। किसान ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके साथ ही जे-फॉर्म और खेत की जियो-टैगिंग जरूरी होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसान ने फसल में बदलाव किया है।
दो चरणों में होगा सत्यापन
फसल का सत्यापन दो चरणों में किया जाएगा:
- पहला चरण: 15 जुलाई से 25 जुलाई
- दूसरा चरण: 5 अगस्त से 15 अगस्त
हर चरण के बाद किसानों को निर्धारित राशि जारी की जाएगी।
किसानों के लिए लाभदायक पहल
सरकार का कहना है कि धान-गेहूं का पारंपरिक चक्र अब टिकाऊ नहीं रह गया है। मक्का की खेती से पानी की बचत होगी और किसानों को बेहतर मुनाफा भी मिल सकता है। साथ ही, सरकार मक्का की खरीद सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
पंजाब सरकार की यह योजना केवल फसल बदलने की पहल नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर किसान इस योजना का लाभ उठाते हैं, तो इससे न केवल उनका आर्थिक स्तर सुधरेगा, बल्कि राज्य का जल संकट भी कम हो सकता है।
