Punjab News: पंजाब सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और नरमा (कपास) की खेती का क्षेत्र बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीटी हाइब्रिड नरमा और देसी कपास के बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और उन्हें धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है।
33% सब्सिडी से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा प्रमाणित बीटी कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास की किस्मों पर यह सब्सिडी दी जाएगी।
सरकार ने 87 अनुमोदित बीटी हाइब्रिड और देसी कपास की चार प्रमुख किस्में—
- एल.डी.1019
- एल.डी.949
- एफ.डी.के.124
- पी.बी.डी.88
को इस योजना में शामिल किया है। इन किस्मों में से किसी भी बीज को खरीदने वाले किसानों को बीज लागत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सब्सिडी के रूप में मिलेगा।
पिछले साल नरमा क्षेत्र में 19% की वृद्धि
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार के सब्सिडी मॉडल को किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
- खरीफ 2024: लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नरमा की खेती
- खरीफ 2025: बढ़कर 1.19 लाख हेक्टेयर
- खरीफ 2026 लक्ष्य: 1.25 लाख हेक्टेयर
यह वृद्धि दर्शाती है कि किसान धीरे-धीरे कपास जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे पानी की बचत और आय में वृद्धि दोनों संभव है।
धान की जगह वैकल्पिक फसल अपनाने की अपील
सरकार ने कपास को “सफेद सोना” बताते हुए किसानों से अधिक पानी की खपत करने वाली धान की फसल के स्थान पर कपास और अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाने की अपील की है।
इस कदम से:
- भूजल संरक्षण में मदद मिलेगी
- खेती की लागत कम होगी
- किसानों की आय बढ़ सकती है
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
सरकार ने इस योजना के लिए 20 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन आवेदन पोर्टल खोल दिया है।
सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसानों को:
- पंजीकृत डीलर से प्रमाणित बीज खरीदना होगा
- खरीद का पक्का बिल सुरक्षित रखना होगा
- आवेदन करते समय बिल को ऑनलाइन अपलोड करना होगा
सत्यापन के बाद 33% सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
जागरूकता अभियान और आसान पहुंच पर जोर
सरकार ने सभी कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी किसान जानकारी या डिजिटल सुविधा की कमी के कारण योजना से वंचित न रहे।
इस पहल से विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में नरमा खेती का विस्तार होने की उम्मीद है और पंजाब की पारंपरिक कपास पट्टी को फिर से मजबूत किया जा सकेगा।
