Punjab News: पंजाब सरकार ने राज्य के बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए ‘पंजाब बाल विकास सम्मेलन 2026’ के तहत ‘नन्हे कदम, बड़ा विकास’ अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्षों को बेहतर बनाना है ताकि उन्हें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक रूप से मजबूत आधार मिल सके।
चंडीगढ़ में आयोजित विशेष कॉन्क्लेव के दौरान सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पंजाब के हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पहले 1000 दिन क्यों हैं सबसे महत्वपूर्ण?
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन सबसे अहम होते हैं। इसमें गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद के पहले दो वर्ष शामिल हैं। इसी दौरान बच्चे के मस्तिष्क का सबसे तेजी से विकास होता है।
उन्होंने कहा कि सही पोषण, माता-पिता का प्यार, बातचीत, खेल, कहानियां और संवेदनशील देखभाल बच्चे की सीखने की क्षमता और व्यक्तित्व की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
घर-घर पहुंचेगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
‘नन्हे कदम’ अभियान के तहत 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर महीने घर-घर जाकर परिवारों से मिलेंगी। वे बच्चों के साथ खेल आधारित गतिविधियां कराएंगी और माता-पिता को उम्र के अनुसार बच्चे की देखभाल और विकास से जुड़ी जानकारी देंगी।
हर बच्चे का बनेगा विकास रिपोर्ट कार्ड
सरकार इस योजना के तहत जन्म से तीन वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का विशेष विकास रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी।
इस रिपोर्ट कार्ड में बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़े सरल प्रश्न होंगे। जैसे बच्चा मुस्कुराता है या नहीं, आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देता है या नहीं, आंखों से वस्तुओं को पहचानता है या नहीं। इन जानकारियों के आधार पर बच्चे की प्रगति का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इसके साथ ही अभिभावकों को चित्रों वाली विशेष पुस्तिका भी दी जाएगी, जिसमें उम्र के अनुसार बच्चों के साथ किए जाने वाले खेल और सीखने की गतिविधियों की जानकारी होगी।
समय रहते होगी विकास संबंधी समस्याओं की पहचान
सरकार का उद्देश्य बच्चों में किसी भी प्रकार की विकास संबंधी समस्या या दिव्यांगता की पहचान शुरुआती स्तर पर करना है, ताकि समय पर उचित उपचार और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
सही पोषण पर रहेगा विशेष ध्यान
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि जन्म से छह महीने तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए सबसे अच्छा भोजन है। इस दौरान बच्चे को पानी, शहद या घुट्टी देने की आवश्यकता नहीं होती।
छह महीने के बाद मां के दूध के साथ घर का बना ताजा और पौष्टिक अर्द्धठोस भोजन शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों को संतुलित आहार देने पर जोर देते हुए कहा कि भोजन में अनाज, दालें, प्रोटीन, दूध, फल और सब्जियां शामिल होनी चाहिए।
कुपोषण की होगी नियमित निगरानी
आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों का वजन और लंबाई नियमित रूप से मापी जाएगी। इसके आधार पर कम वजन, अवरुद्ध वृद्धि और गंभीर कुपोषण की समय रहते पहचान कर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके लिए सभी जानकारी पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज की जाएगी ताकि प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
खेल-खेल में होगी स्कूल की तैयारी
सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों में आधारशिला आधारित पाठ्यक्रम लागू कर रही है। बच्चों को कहानियों, फ्लैश कार्ड, गीतों और डिजिटल सामग्री के माध्यम से खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे स्कूल जाने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
अब तक 27,307 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है।
मिशन आरंभ को मिला व्यापक समर्थन
राज्य के सभी 23 जिलों में चल रहे ‘मिशन आरंभ’ अभियान को भी लोगों का अच्छा सहयोग मिला है।
- लगभग 1.6 लाख अभिभावक व्हाट्सएप होम लर्निंग अभियान से जुड़े हैं।
- 26,209 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।
बाल विकास में बढ़ी अभिभावकों की भागीदारी
वर्ष 2025-26 में आयोजित ईसीसीई दिवस (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा दिवस) में 15.59 लाख से अधिक अभिभावकों ने भाग लिया।
इनमें:
- 10.76 लाख माताएं
- 4.83 लाख पिता
शामिल रहे। सरकार का मानना है कि बच्चों के विकास में परिवार की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
सरकार का लक्ष्य हर बच्चे तक सुविधाएं पहुंचाना
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि हर परिवार तक खुशहाली पहुंचाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किसी घर में जाती है तो वह केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि माता-पिता को बच्चे के बेहतर भविष्य का भरोसा भी देती है।
सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चे को बेहतर पोषण, अच्छी शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिले।
आंगनवाड़ी और स्कूलों के बीच बढ़ेगा तालमेल
सम्मेलन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित गृह भ्रमण, पोषण ट्रैकर का सही उपयोग, देखभाल दिवस और ईसीसीई दिवस आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
साथ ही जरूरतमंद बच्चों के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर समन्वय तथा आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
पंजाब सरकार का संदेश
सम्मेलन का मुख्य संदेश स्पष्ट था कि यदि सही पोषण, प्रारंभिक सीख, विकास की नियमित निगरानी, स्कूल-पूर्व शिक्षा और परिवार की भागीदारी को एक साथ जोड़ा जाए, तो पंजाब के हर बच्चे के स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
