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Noida: नोएडा के TCS इंजीनियर को 10 साल बाद मिला न्याय, 2015 में गोली मारकर की गई थी हत्या

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Noida में 2015 में हुए बहुचर्चित सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान हत्याकांड में आखिरकार 10 साल बाद इंसाफ मिला है।

Noida News: नोएडा में साल 2015 में हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान मर्डर केस (Ankit Chauhan Murder Case) में नई दिल्ली स्थित सीबीआई कोर्ट (CBI Court) ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शशांक जादौन और मनोज कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने शशांक पर 70 हजार रुपये और मनोज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। करीब 10 साल बाद अंकित चौहान को न्याय मिला है। आइए जानते हैं पूरा मामला…

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10 साल पुराना हत्याकांड जिसने नोएडा को हिला दिया था

13 अप्रैल 2015 को नोएडा सेक्टर-76 के पास हुई यह घटना पूरे शहर ही नहीं, बल्कि प्रदेश में सनसनी बन गई थी। उस दिन हुई इस वारदात ने नोएडा से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा दिया था। सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई। अदालत ने यह फैसला सुनाने से पहले 20 सितंबर 2025 को दोनों को दोषी करार दिया था।

कौन थे अंकित चौहान?

27 वर्षीय अंकित चौहान (Ankit Chauhan), मूल रूप से मेरठ निवासी थे और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी अमीषा चौहान के साथ सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टेरिया अपार्टमेंट में रहते थे।

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13 अप्रैल 2015 को उनकी छुट्टी थी। दोपहर के समय वे अपने मित्र गगन के साथ पत्नी के ऑफिस (सेक्टर-135) लंच देने गए थे। लौटते वक्त सेक्टर-76 के पास उनकी फॉर्च्यूनर कार पर सफेद होंडा एकॉर्ड कार में आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे अंकित की मौके पर ही मौत हो गई।

गगन ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन कैलाश अस्पताल में डॉक्टरों ने अंकित को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद सेक्टर-49 थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

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जानिए वारदात की पूरी टाइमलाइन

13 अप्रैल 2015:- सेक्टर-76 के पास TCS इंजीनियर अंकित चौहान की गोली मारकर हत्या की गई।

2015–2016:- एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस की कई टीमें जांच में जुटीं, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। जांच में लगातार अधिकारी और टीमें बदली गईं।

22 फरवरी 2016:- पुलिस की लापरवाही से नाराज होकर अंकित की मां पुष्पा चौहान ने एसएसपी ऑफिस में आत्मदाह की धमकी दी। इसके बावजूद केस में प्रगति नहीं हुई।

14 जून 2016:- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा पुलिस की नाकामी देखते हुए केस की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

2017:- सीबीआई ने जांच पूरी कर शशांक जादौन और मनोज कुमार को गिरफ्तार किया।

29 अगस्त 2017:- सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों पर धारा 302 (हत्या), डकैती का प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र और सबूत नष्ट करने के आरोप लगाए गए।

2 अगस्त 2019:- सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को गाजियाबाद से नई दिल्ली स्थित सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया।

20 सितंबर 2025:- सीबीआई अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

13 अक्टूबर 2025:- अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए शशांक पर 70 हजार रुपये और मनोज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

पुलिस जांच पर सवाल

अंकित चौहान (Ankit Chauhan) की दिनदहाड़े हुई हत्या ने पूरे नोएडा को झकझोर दिया था। उस समय आईजी आलोक शर्मा और एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के निर्देशन में पुलिस की कई टीमें बनाई गईं, लेकिन एक साल तक भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अंकित की मां पुष्पा चौहान ने फरवरी 2016 में एसएसपी ऑफिस में आत्मदाह की धमकी देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर केस दबा रही है।

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हाई कोर्ट और सीबीआई की भूमिका

नोएडा पुलिस (Noida Police) की असफलता के बाद अंकित के परिजनों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने 14 जून 2016 को केस सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। सीबीआई की जांच में सामने आया कि शशांक जादौन और मनोज कुमार ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंकित की हत्या की थी। दोनों को 2017 में गिरफ्तार किया गया। जांच में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा और गवाहों के बयान प्रमुख भूमिका में रहे।

जल्दी पैसा कमाने की चाह में शशांक ने चुना अपराध का रास्ता

शशांक जादौन ने अपनी प्रभावशाली योग्यता पर भरोसा करने के बजाय जल्दी रुपये कमाने के लिए अपराध का रास्ता चुना। जादौन के बारहवीं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए थे। उसने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद वह रियल एस्टेट में लग गया, जहां उसे भारी नुकसान हुआ। उसने कथित तौर पर अपने दोस्त पवन कुमार, जो एक सह-आरोपी था और जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है, से कर्ज लिया था, लेकिन वह उसे चुका नहीं पाया।

मनोज कुमार ने नुकसान की भरपाई के लिए एक एसयूवी चुराकर उसे अपने दोस्त को बेचने का आइडिया दिया। वारदात के बाद जादौन दो साल से ज्यादा समय तक जांच एजेंसियों से बचता रहा। विशेष जज ज्योति क्लेर ने 20 सितंबर को उसे दोषी ठहराया था।

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10 साल बाद मिला इंसाफ

करीब एक दशक की कानूनी प्रक्रिया के बाद 13 अक्टूबर 2025 को सीबीआई अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या पूर्व नियोजित और क्रूरता से की गई थी।

अंकित के पिता धर्मवीर चौहान ने कहा, ’10 साल बाद हमें बेटे के लिए इंसाफ मिला है। यह सफर बेहद दर्दनाक रहा, लेकिन अब भरोसा हुआ कि कानून के जरिए अपराधियों को सजा मिलती है।’ वहीं, मां पुष्पा चौहान की आंखों में आंसू थे, पर चेहरे पर संतोष और तसल्ली झलक रही थी।

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सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि शुरुआती साक्ष्य मिटा दिए गए थे। बावजूद इसके, साइंटिफिक एनालिसिस, डिजिटल डेटा और गवाहों की मदद से आरोपियों तक पहुंचा गया।