Home Is Not a Battlefield: Initiatives for Dialogue and Balance at Home

Noida: Home Is Not a Battlefield: घर में ‘संवाद और संतुलन’ पर जागरूकता कार्यक्रम

दिल्ली NCR नोएडा
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Jyoti Shinde, Editor, Khabri Media

घर को तनाव नहीं, समझ का स्थान बनाएं

जहाँ युद्ध नहीं, समझ हो — वही घर है..गुस्से से नहीं, संवाद से सुलझते हैं रिश्ते

Noida: नोएडा के सेक्टर 75 स्थित Club 75 में माता-पिता और बच्चों के लिए “Home Is Not a Battlefield” (घर युद्ध का मैदान नहीं है) विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य परिवारों में सामंजस्य, आपसी समझ और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में मुख्य तौर पर घर के साथ माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक संवाद, भावनात्मक संतुलन और पारस्परिक सम्मान के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस सत्र का संचालन किरण कलरा जी ने किया। आपको बता दें किरण कालरा एक प्रमाणित काउंसलर एवं राजयोग प्रशिक्षक हैं। किरण जी ने संवादात्मक चर्चा और सरल उदाहरणों के माध्यम से बताया कि दैनिक जीवन के छोटे-छोटे तनाव और टकराव को शांति और समझदारी से कैसे सुलझाया जा सकता है।

किरण कालरा जी ने बड़े ही आसान शब्दों में घर की परिभाषा समझाई। उन्होंने ये भी बताया कि घर सिर्फ दो शब्द नहीं बल्कि ये पूरा संसार है जिसमें हमारा Emotional Attachment यानी भावनात्म लगाव जुड़ा रहता है।  उन्होंने बताय कि घर…एक ऐसी जगह जहाँ सबसे पहले प्रेम सीखते हैं, जहाँ इंसान खुद को सुरक्षित महसूस करता है वहां गलतियाँ करने की आज़ादी होती है।

लेकिन आज के समय में, काम का तनाव, पढ़ाई का दबाव, मोबाइल, अपेक्षाएँ, तुलना, ये सब धीरे-धीरे घर के भीतर छोटे-छोटे संघर्षों को जन्म दे देते हैं। और वही संघर्ष कभी आवाज़ ऊँची कर देते हैं, कभी खामोशी में बदल जाते हैं, तो कभी दिलों के बीच दीवार बन जाते हैं।

जागरूकता सत्र आयोजन मुख्य रूप से माता-पिता और बच्चों के रिश्तों पर केंद्रित था ताकि ये सभी लोग अपना दायित्व समझें और घर फिर से शांति, समझ और प्रेम का स्थान बन सके। किरण कालरा जी ने बड़े आसान शब्दों में एक गहरी बात कही —
समस्या घर में नहीं होती, समस्या हमारे प्रतिक्रिया देने के तरीके में होती है।

माता-पिता अक्सर कहते हैं, “हम बच्चों के लिए ही तो सब कर रहे हैं।” और बच्चे सोचते हैं “कोई हमें समझता ही नहीं।” दोनों सही हैं…लेकिन संवाद के बिना, दोनों अकेले पड़ जाते हैं और वाद विवाद हो जाता है।

सत्र के दौरान यह समझाया गया कि सकारात्मक संवाद मतलब सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि सुनना भी है, बिना टोके, बिना जज किए। बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि उनकी बात मायने रखती है। और माता-पिता को यह समझना चाहिए कि डिसिप्लिन और डर में फर्क होता है। किरण कलरा ने दैनिक जीवन से जुड़े छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से बताया कि
जब गुस्सा आए, तो प्रतिक्रिया से पहले एक पल रुकना कितना ज़रूरी है। क्योंकि उसी एक पल में झगड़ा टल भी सकता है और रिश्ता बच भी सकता है।

इस सत्र का एक विशेष और प्रभावशाली हिस्सा रहा राजयोग ध्यान.  राजयोग को सिर्फ ध्यान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला बताया गया। यह समझाया गया कि नियमित राजयोग अभ्यास से —

  • क्रोध पर नियंत्रण संभव है
  • तनाव धीरे-धीरे कम होता है
  • विचार स्पष्ट होते हैं
  • और सबसे ज़रूरी बात कि इससे  —घर का वातावरण शांत बनता है।

जब मन शांत होता है, तो शब्द भी कोमल हो जाते हैं। और जब शब्द कोमल होते हैं, तो रिश्ते मजबूत बनते हैं।

किरण कालरा जी ने “Inner Soul  यानी शरीर के भीतर की ऊर्जा” के बारे में दर्शकों को बताया। उन्होंने कहा कि हम सब अपने शरीर को जानते हैं। हम उसका आकार जानते हैं, उसकी ज़रूरतें जानते हैं, उसकी थकान, उसका दर्द पहचानते हैं। लेकिन एक सवाल शायद ही कभी पूछते हैं इस शरीर को चलाने वाली ऊर्जा क्या है?

जिसे हम Inner Soul, अंतरात्मा, या आंतरिक चेतना  कहते हैं। Inner Soul वह ऊर्जा है जो आँखों से नहीं दिखती, लेकिन हर अनुभव में महसूस होती है। वह ऊर्जा जो सोचती है, जो निर्णय लेती है, जो क्रोध करती है और जो प्रेम भी करती है। शरीर थकता है, लेकिन Inner Soul नहीं। शरीर बीमार होता है, पर Inner Soul शुद्ध और स्थिर रहती है।

Inner Soul हमारी सोच का स्रोत है। जैसी सोच, वैसे विचार। जैसे विचार, वैसे शब्द। और जैसे शब्द, वैसे हमारे रिश्ते। अगर Inner Soul अशांत है, तो बाहर की दुनिया भी हमें अशांत ही दिखाई देती है। लेकिन अगर Inner Soul शांत है,
तो कठिन परिस्थितियों में भी हम संतुलन बनाए रख सकते हैं। यही कारण है कि शांति बाहर नहीं, भीतर से आती है। Inner Soul की ऊर्जा हमारे ध्यान से बढ़ती है। जिस पर हम ध्यान देते हैं, वही शक्ति बन जाता है। नकारात्मक सोच इस ऊर्जा को कमज़ोर करती है। डर, क्रोध, ईर्ष्या Inner Soul को भारी बना देते हैं। वहीं प्रेम, कृतज्ञता और विश्वास इस ऊर्जा को शुद्ध और शक्तिशाली बनाते हैं।

राजयोग ध्यान Inner Soul से जुड़ने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। राजयोग में हम शरीर से अलग होकर
स्वयं को एक शांत, उज्ज्वल ऊर्जा के रूप में अनुभव करते हैं। जब हम रोज़ कुछ मिनट Inner Soul से जुड़ते हैं, तो मन हल्का होता है, विचार साफ़ होते हैं, और निर्णय बेहतर होते हैं। धीरे-धीरे हम बाहरी परिस्थितियों से कम प्रभावित होने लगते हैं। Inner Soul मजबूत होती है, तो आत्मविश्वास बढ़ता है। और आत्मविश्वास बढ़ता है, तो जीवन सहज लगने लगता है।

माता-पिता ने इस सत्र में खुलकर अपनी बातें साझा कीं। कई माता-पिता ने महसूस किया कि शायद अनजाने में वे सुनने से ज़्यादा समझाने लगे थे। और बच्चों ने यह जाना कि माता-पिता की सख्ती के पीछे अक्सर चिंता और प्रेम छिपा होता है।

कार्यक्रम को सभी प्रतिभागियों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा कि यह सत्र सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर था। एक ऐसा अवसर जहाँ उन्होंने अपने भीतर झाँककर रिश्तों को बेहतर बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए सम्मानित अतिथियों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

सत्र का समापन एक बहुत सशक्त संदेश के साथ हुआ —

शांत मन ही
प्रेमपूर्ण और सौहार्दपूर्ण
घर का निर्माण करता है।

अगर मन युद्ध में है, तो घर भी युद्ध का मैदान बन जाता है। लेकिन अगर मन शांत है, तो वही घर स्वर्ग बन सकता है।

क्योंकि
Home Is Not a Battlefield —
Home Is Where Healing Begins.