MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की और राज्य में गेहूं उपार्जन (procurement) और भंडारण व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। मध्य प्रदेश में इस प्रणाली की कार्यक्षमता देश में सर्वश्रेष्ठ में से एक मानी जा रही है।
गेहूं उपार्जन में मध्य प्रदेश की अग्रणी भूमिका
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद और भंडारण के काम में पारदर्शिता, सुव्यवस्था और तेजी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को समय पर बिक्री और भंडारण का भरोसेमंद विकल्प देती है।
किसान कल्याण वर्ष का महत्व
सीएम ने कहा कि राज्य में मनाए जा रहे “किसान कल्याण वर्ष” के तहत किसानों के हित में कई कदम उठाए जा रहे हैं। गेहूं उपार्जन और भंडारण को बेहतर बनाने के लिए सभी ज़रूरी तैयारियाँ की जा रही हैं ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो और उन्हें समय पर उचित भुगतान मिल सके।
केंद्रीय सहयोग का आश्वासन
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को गेहूं उपार्जन और भंडारण के लिए हर सम्भव सहयोग देगी। इससे राज्य की कृषि व्यवस्था और किसानों का आत्म-विश्वास दोनों मजबूत होंगे।
गेहूं खरीद का रिकॉर्ड
पिछले साल मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद ने नई कीर्तिमान दर्ज की है। सरकार ने रबी मौसम में लगभग 76 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा और कुल खरीद 85 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है।
MSP और बोनस से लाभ
राज्य सरकार गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर की दर पर करती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है। इसके अलावा पिछले सत्रों में बोनस और अतिरिक्त प्रोत्साहन भी किसानों को दिए जा चुके हैं, ताकि वे बेहतर लाभ प्राप्त कर सकें।
किसानों के लिए सुविधाएँ
गेहूं उपार्जन के लिए किसानों को सरकार द्वारा पंजीकरण और आसान बिक्री व्यवस्था प्रदान की जाती है। किसान मोबाइल या गांव में स्थित केंद्रों के माध्यम से भी आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे उनकी उपज सरकारी खरीद केंद्रों तक पहुँचती है।
राज्य और केंद्र का सहयोग
मुलाकात के दौरान सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री के बीच किसानों के हित, भंडारण सुविधाओं और बेहतर कृषि व्यवस्था को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य-केंद्र सहयोग से कृषि क्षेत्र में और सुधार संभव है।
