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Media Report Card: आज TRP नहीं मीडिया का रिपोर्ट कार्ड पढ़िए!

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Media Report Card: साल 2024 पत्रकारों के लिए किसी भी मायने में अच्छा नहीं रहा है। इस साल मीडिया ने कई पत्रकार साथी खो दिए। उसके बाद तो जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है। न्यूज18 इंडिया(News18 India), एबीपी न्यूज़(ABP News), टाइम्स नाउ नवभारत(Times Now Navbharat), न्यूज़ नेशन(News Nation) जैसे बड़े चैनलों से दर्जनों पत्रकारों की नौकरी चली गई। पत्रकार सीधे न्यूजरूम से सड़क पर आ गए। साल जाते जाते सबसे ज्यादा कमाल तो न्यूज नेशन(News Nation) ने दिखाया। सूत्रों के मुताबिक चैनल ने जाते जाते 200 से ज्यादा पत्रकारों को बेरोजगार कर दिया। प्रोड्यूसर्स, टेक्निकल, एंकर्स, रिसर्च, IT से तमाम पत्रकार साथी बेरोजगार हो गए। कहीं कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी तो कहीं नए सत्ताधारी संपादक ने गिन-गिन कर लोगों को बेरोजगार करना शुरू कर दिया।

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इसके बाद खुद को नेशनल चैनल कहलाने वाले चंद दूसरे चैनलों के बारे में भी जान लीजिए। कहीं सैलरी 25 दिन बाद तो कहीं 1 महीने तो कहीं उससे भी ज्यादा दिनों बाद-बाद सैलरी आ रही है। मजबूर पत्रकार करे भी क्या..जाए भी तो कहां? हाल फिलहाल नोएडा से मुंबई और कश्मीर से कन्याकुमारी तक पोस्टरों के जरिए छाने वाले नेशनल चैनल का भी हाल बुरा है। पहले तो वहां छंटनी हुई और सुनने में ये आ रहा है कि अब वहां भी सैलरी के लाले पड़े हैं। चैनल के पत्रकार दूसरी जगहों पर नौकरी खोज रहे हैं। एक बड़े ग्रुप के चैनल से भी छंटनी की खबर सामने आ रही है। कुछ खुद से छोड़कर जा रहे हैं तो कुछ का काम अंदर ही अंदर तमाम कर दिया जा रहा है।

इन सबके बीच कुकुरमुत्तों की तरह उग आए रीजनल चैनल्स का हाल तो पूछिए मत..ये कब खुल जाते हैं और कब बंद हो जाते हैं किसी को पता ही नहीं चलता। हां उनको जरूर तकलीफ होती है जिन्हें सब्जबाग दिखाकर चैनल में नौकरी दी जाती है। लेकिन ऐसे चैनलों की हकीकत 1 महीने में ही नजर आनी शुरू हो जाती है। अगर आंकड़ों को सच माने तो इस 1 साल में 1 हजार से ज्यादा पत्रकार बेरोजगार हो चुके हैं। खुद का तो छोड़िए, परिवार का पेट पालना इनके लिए भारी पड़ रहा है। लेकिन संपादक और मालिकान..आप टेंशन मत लीजिए..आप में से एक गद्दी बचाइए और दूसरा.. तिजोरी भरिए। नेक सलाह तो यही है। बाकी पत्रकारों का क्या..मरें तो मरें।