Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के डोंगनाला गांव की आदिवासी महिलाओं ने वन धन विकास केंद्र (VDVK) योजना के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। हरिबोल स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 12 महिलाओं ने हर्बल उत्पादों के कारोबार के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक मॉडल भी स्थापित किया है।
दिहाड़ी मजदूरी से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर
हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। सीमित आय और रोजगार की अनिश्चितता उनके सामने बड़ी चुनौती थी।
लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं को नया अवसर मिला और उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया।
प्रशिक्षण ने दिलाई नई पहचान
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज का बेहतर उपयोग करने के लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
उन्हें हर्बल उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में आयुर्वेद विशेषज्ञों और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हर्बल उत्पादों की बाजार में बढ़ी मांग
प्रशिक्षण के बाद समूह ने कई हर्बल उत्पाद तैयार करने शुरू किए, जिनमें प्रमुख हैं:
- त्रिफला चूर्ण
- अश्वगंधा चूर्ण
- हर्बल फेस पैक
- हर्बल हेयर पाउडर
- हर्बल टूथ पाउडर
गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय और संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।

आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर
समूह की सफलता को उस समय नई पहचान मिली जब आयुष विभाग ने उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पाद आपूर्ति का ऑर्डर दिया।
इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपये का लाभ हुआ। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला।
एक साल में 38.90 लाख रुपये का लाभ
वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने करीब 38.90 लाख रुपये का लाभ और कमीशन अर्जित किया।
इस आय ने समूह से जुड़ी महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया और उनके जीवन स्तर में सुधार लाया।
26 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री का रिकॉर्ड
वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक लगभग 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज की है।
यह उपलब्धि समूह की मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।
हर सदस्य की वार्षिक आय पहुंची 1.7 लाख रुपये
इस योजना से जुड़ने के बाद समूह की प्रत्येक महिला सदस्य की औसत वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपये हो गई है।
आर्थिक मजबूती के साथ महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हरिबोल स्वयं सहायता समूह को ट्रायफेड (TRIFED) और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ और बाजार तक पहुंच मिलने पर आदिवासी महिलाएं भी बड़े स्तर पर उद्यमिता कर सकती हैं।
डोंगनाला की यह कहानी आज प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
बड़ी तस्वीर
वन धन विकास केंद्र योजना ने डोंगनाला की 12 आदिवासी महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। दिहाड़ी मजदूरी से शुरू हुआ उनका सफर आज करोड़ों रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। यह सफलता बताती है कि सरकारी योजनाओं, कौशल विकास और सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है।
