लिखित परीक्षा में 88 फीसद नंबर लेकिन मौखिक में दो बार कर दिया फेल!
कोर्ट ने कहा- ये ‘उत्पीड़न’ है; वायुसेना को लगा बड़ा झटका
Lucknow News: कहानी एक जवान की, जो अफ़सर की आँख में खटक गया
यह कहानी है वायुसेना के कॉर्पोरल हर्ष कुमार की, जिसने देश सेवा के लिए 2008 में इंडियन एयरफोर्स जॉइन की। एक जवान के लिए प्रमोशन सिर्फ़ अगला रैंक नहीं होता, वो सालों की मेहनत और अच्छी सेवा फल होता है। कॉर्पोरल हर्ष कुमार सार्जेंट प्रमोशन के लिए तैयारी की और प्रमोशन परीक्षा मे शामिल हुए और लिखित परीक्षा में हर्ष कुमार ने शानदार प्रदर्शन किया, मगर होनी को कुछ और मंजूर था।
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‘सिगरेट पीते देखा’, और शुरू हुआ उत्पीड़न का खेल !
कोर्ट में कॉर्पोरल हर्ष कुमार के वकील, एडवोकेट राज कुमार मिश्रा और एडवोकेट चंदन कुमार पाण्डेय ने जो कहानी बयां की, वो आँखें खोलने वाली थी। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र के बाहर, प्रेसाइडिंग ऑफिसर ने कॉर्पोरल हर्ष कुमार को सिगरेट पीते हुए देख लिया। बस! एक प्रेसाइडिंग ऑफिसर का ‘ईगो’ (अहंकार) आहत हो गया। यह सोच कि ‘एक जवान होकर, वो भी एक अफ़सर के सामने इस तरह धूम्रपान करे,’ अफ़सर को नागवार गुज़री। कथित तौर पर, अफ़सर ने इस बात की खुन्नस परीक्षा में निकाली और कॉर्पोरल हर्ष कुमार को मौखिक परीक्षा मे मात्र 6 नंबर देकर फेल कर दिया।इस परीक्षा मे नंबर देने का अधिकार अफ़सर के हाथ में था। हर्ष कुमार को 25 में से सिर्फ़ 06 नंबर दिए गए जिसे वह फेल हो गए, जबकि पास होने के लिए 60% नंबर चाहिए थे । परंतु हर्ष ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने दोबारा तैयारी की। लेकिन जब सत्र जनवरी-जून 2020 में दोबारा परीक्षा हुई, तो अफ़सरशाही का चक्र फिर घूम गया। प्रेसाइडिंग ऑफिसर वही अफसर था जिसने इस बार भी, हर्ष कुमार को 25 में से ठीक 06 नंबर दे दिया! दोनों बार, लिखित परीक्षा में अच्छे नंबर लाने वाला जवान मौखिक परीक्षा में जानबूझकर फ़ेल कर दिया गया।
कोर्ट में खुला अफ़सरों की ‘Pick and Choose’ नीति का राजजवान हर्ष कुमार के साथ एक और बड़ी नाइंसाफी की गई थी, जिसने मामले को और पेचीदा बना दिया। एक तरफ तो अफ़सर के ईगो के चलते उन्हें दो बार 06 नंबर देकर फेल कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ वायुसेना की दोहरी नीति का शिकार बना दिया गया। दरअसल, COVID-19 लॉकडाउन के दौरान, वायुसेना ने 13 जुलाई 2020 को एक पॉलिसी जारी की थी, जिसके तहत जो कैंडिडेट महामारी के कारण Viva-Voce (मौखिक परीक्षा) नहीं दे पाए थे (जिन्हें ‘Left-Over Candidates’ कहा गया), उन्हें इस परीक्षा से छूट दे दी गई थी; उनका रिजल्ट सिर्फ लिखित परीक्षा के नंबरों के आधार पर घोषित कर पास कर दिया गया। वहीं चूंकि Cpl हर्ष कुमार ने अपनी Viva-Voce पहले ही दे दी थी और अफ़सर ने उन्हें फेल कर दिया था, इसलिए उन्हें इस पॉलिसी का फायदा नहीं दिया गया और उन्हें फेल ही रखा गया। कोर्ट ने इसे “पिक एंड चूज़” की नीति बताया और कहा कि यह क़ानूनी तौर पर दोहरा मापदंड है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट में खुला अफ़सरों की ‘Pick and Choose’ नीति का राज
जवान हर्ष कुमार के साथ एक और बड़ी नाइंसाफी की गई थी, जिसने मामले को और पेचीदा बना दिया। एक तरफ तो अफ़सर के ईगो के चलते उन्हें दो बार 06 नंबर देकर फेल कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ वायुसेना की दोहरी नीति का शिकार बना दिया गया। दरअसल, COVID-19 लॉकडाउन के दौरान, वायुसेना ने 13 जुलाई 2020 को एक पॉलिसी जारी की थी, जिसके तहत जो कैंडिडेट महामारी के कारण Viva-Voce (मौखिक परीक्षा) नहीं दे पाए थे (जिन्हें ‘Left-Over Candidates’ कहा गया), उन्हें इस परीक्षा से छूट दे दी गई थी; उनका रिजल्ट सिर्फ लिखित परीक्षा के नंबरों के आधार पर घोषित कर पास कर दिया गया। वहीं चूंकि Cpl हर्ष कुमार ने अपनी Viva-Voce पहले ही दे दी थी और अफ़सर ने उन्हें फेल कर दिया था, इसलिए उन्हें इस पॉलिसी का फायदा नहीं दिया गया और उन्हें फेल ही रखा गया। कोर्ट ने इसे “पिक एंड चूज़” की नीति बताया और कहा कि यह क़ानूनी तौर पर दोहरा मापदंड है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आर्ड फोर्स ट्राइब्यूनल कि क्षेत्रीय बेंच, लखनऊ ने इस पर सख़्त टिप्पणी की और कहा किः
दो अलग अलग परीक्षा में एक जैसे 06 नंबर मिलना, शक पैदा करता है। अगर परीक्षक अलग थे, तो नंबर भी अलग होने चाहिए थे। वहीं वायुसेना ने लेफ्ट ओवर कंडीडटेस (Left-Over Candidates) को छूट दी, लेकिन हर्ष कुमार को नहीं दिया यह “Pick and Choose” (पिक एंड चूज़) की नीति है, जो क़ानून में बिल्कुल सही नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह ‘दोहरा मापदंड’ है।
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ट्रिब्यूनल का ऐतिहासिक फैसलाः जवान को मिली जीत !
आर्ड फोर्सेज़ ट्रिब्यूनल ने जवान के संघर्ष और उनके वकीलों की दलीलों को सही ठहराया। ट्रिब्यूनल ने कॉर्पोरल हर्ष कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया और वायुसेना को आदेश दिया किः
1. कॉर्पोरल हर्ष कुमार को प्रमोशन परीक्षा का एक और मौका दिया जाए।
2. यह परीक्षा उन सभी अफ़सरों, जिन्होंने पहले उनकी परीक्षा ली थी, से अलग टीम द्वारा आयोजित की जाए
3. अगर हर्ष कुमार इस बार पास होते हैं, तो उन्हें उनके दूसरे प्रयास की तारीख से ही पास माना जाएगा। यानी उन्हें 30 जून 2020 के बाद से प्रमोशन और सभी लाभमिलेंगे।
यह फैसला दिखाता है कि अफ़सरशाही और सेना के कुछ अफसरों के अहंकारी रवैये के कारण किस प्रकार से आज भी जवानों का उत्पीड़न किया जाता है। हालांकि अब यह उत्पीड़न काफी हद तक कम हो चुका है। अंग्रेजों देश छोड़ कर चले गए लेकिन गाहे बगाहे उनकी दी हुई अफसरशाही अभी भी विद्यमान नजर आ जाती है जिसे सेना को अभी तक पूरा निजात नहीं मिल सका है।

