संवैधानिक सुधारों पर बढ़ा मंथन, दिल्ली में जेपीसी ने CM Rekha Gupta से की विस्तृत चर्चा

दिल्ली NCR
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CM Rekha Gupta: देश की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में चल रही कवायद के तहत संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की। बैठक के दौरान समिति ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों से जुड़े प्रस्तावित बदलावों और उनके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

तीन अहम विधेयकों की समीक्षा में जुटी है समिति

सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति वर्तमान में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक-2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक-2025 और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक-2025 का अध्ययन कर रही है। समिति विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर संबंधित पक्षों की राय भी जुटा रही है।

दिल्ली दौरे के दौरान समिति ने मुख्यमंत्री को इन विधेयकों की प्रतियां और संबंधित दस्तावेज सौंपे तथा प्रस्तावित संशोधनों के उद्देश्य और संभावित परिणामों की जानकारी दी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहा विशेष जोर

बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बढ़ाने और संवैधानिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी इन बदलावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता और जनविश्वास भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ने समिति को दिल्ली की प्रशासनिक संरचना और उसकी विशेष संवैधानिक स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार शासन में पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना और जनता का भरोसा बनाए रखना सभी संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।

130वें संविधान संशोधन विधेयक पर मुख्यमंत्री की राय

रेखा गुप्ता ने कहा कि संविधान (130वां संशोधन) विधेयक सार्वजनिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। उनके अनुसार, संवैधानिक नैतिकता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने वाले सुधार लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि समिति को विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझाव और विचार भविष्य में बेहतर शासन व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी साबित होंगे।

सभी दलों के सांसद रहे मौजूद

बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें डॉ. के. लक्ष्मण, उज्ज्वल निकम, डी.के. अरुणा, पुरुषोत्तम रुपाला, असदुद्दीन ओवैसी, डॉ. इंद्रा हैंग सुब्बा, अनुराग ठाकुर, बृजलाल, बृजमोहन अग्रवाल और मानन कुमार मिश्रा शामिल रहे। लोकसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चर्चा में भाग लिया।

नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कर चुकी है दौरा

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि जेपीसी अब तक 11 बैठकों का आयोजन कर चुकी है। समिति राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पंजाब समेत नौ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने विधेयकों का समर्थन किया है, जबकि कई महत्वपूर्ण सुझाव लिखित रूप में समिति को सौंपे गए हैं। इन सुझावों पर विचार करने के बाद समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।

नवंबर 2025 में हुआ था समिति का गठन

गौरतलब है कि इन विधेयकों की विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। समिति की सिफारिशें भविष्य में देश की संवैधानिक और प्रशासनिक संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का आधार बन सकती हैं।