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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में 4200 फ़्लैटों की रजिस्ट्री क्यों अटकी?

ग्रेटर नोएडा- वेस्ट दिल्ली NCR नोएडा
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Greater Noida में 4200 फ्लैटों की रजिस्ट्री रुकी, जानिए क्या है कारण

Greater Noida: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से बड़ी खबर सामने आ रही है। आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा में 4200 फ्लैटों की रजिस्ट्री रुक गई है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Yeida) क्षेत्र में चार बिल्डर प्रोजेक्ट में फंसे 4200 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री फंस गई है। इन बिल्डरों ने अमिताभ कांत समिति (Amitabh Kant Committee) की सिफारिशों के तहत अबतक 25 प्रतिशत राशि जमा नहीं की है। इनमें सुपरटेक के दो प्रोजेक्ट एनसीएलटी में हैं। ओरिस और एसडीएस इंफ्रा प्रोजेक्ट (SDS Infra Project) ने कोर्ट से स्टे लिया है। लेकिन प्राधिकरण (Authority) बिल्डरों को मुकदमे वापस लेकर बकाया चुकाने के बाद लाभ देने के लिए राजी है, लेकिन बिल्डरों की ओर से प्राधिकरण के इस प्रस्ताव पर अभी कोई जवाब नहीं आया है।
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प्राधिकरण के एक अधिकारी के अनुसार यमुना क्षेत्र में कुल 11 बिल्डर परियोजना हैं। इन बिल्डरों पर लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का बकाया है, जिन्हें बिल्डर जमा नहीं कर रहे थे। इसके लिए बीते साल सिंतबर में शासन ने अमिताभ कांत समिति (Amitabh Kant Committee) की सिफारिशों को लागू करते हुए बिल्डरों को 25 प्रतिशत रकम जमा कराकर रजिस्ट्री शुरू करने की छूट दी। लेकिन इसका लाभ मात्र 7 बिल्डर परियोजनाओं ने ही लिया। इनमें ओमनिस डेवलपर, एटीएस रियलटी, सनवर्ल्ड, ग्रीनबे, लॉजिक्स बिल्ड स्टेट एवं दो सबलेसी (बिल्डर के आवंटी) अजय रियलकॉन और स्टार सिटी शामिल हैं। वहीं, बाकी 4 प्रोजेक्ट के बिल्डरों ने बकाया नहीं जमा किया।

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प्राधिकरण सशर्त लाभ देने को राजी

एसडीएस बिल्डर ने प्राधिकरण से बीते दिनों उन्हें भी अमिताभ कांत समिति के तहत जीरो पीरियड का लाभ देने की मांग की। इस मांग पर विचार करते हुए प्राधिकरण ने बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पेश किया था। यमुना सिटी में एसडीएस को 2 प्लॉट आवंटित हैं, इनमें एसडीएस हाउसिंग व एसडीएस इंफ्राकोन शामिल है। बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया था कि अगर बिल्डर कोर्ट में विचाराधीन मामला वापस लेता है और प्राधिकरण को कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करता है तो सिफारिशों का लाभ दे दिया जाएगा। इस फैसले से अन्य बिल्डर को लाभ हासिल करने का रास्ता खुलेगा।

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बकायेदार बिल्डर परियोजनाओं की स्थिति

परियोजना बकाया (करोड़ में) स्टेटस
सेक्टर-22डी ओरिस डवलपर प्राइवेट लिमिटेड 918.84 कोर्ट स्टे

सेक्टर-26ए एसडीएस इंफ्राकोन प्राइवेट लिमिटेड 742.31 कोर्ट स्टे

सेक्टर-22डी सुपरटेक टाउनशिप प्रोजेक्ट लिमिटेड 784.39 एनसीएलटी

सेक्टर-17ए सुपरटेक लिमिटेड 548.15 एनसीएलटी

कुल 2993.69

नोट: इन बिल्डरों को 25 प्रतिशत के तौर पर प्राधिकरण को 748.42 करोड़ का भुगतान करना होगा।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के अनुसार अमिताभ कांत समिति के तहत 11 में से सात बिल्डरों ने 25 प्रतिशत बकाया चुका दिया। 4 बिल्डर प्रोजेक्ट ने अभी रकम नहीं जमा की है, इनके खरीदारों के रजिस्ट्री अटकी है, प्राधिकरण इन बिल्डरों को सशर्त लाभ देने को तैयार है।