Greater Noida west

Greater Noida west: जिम करके लौट रहे थे शरद तभी हुआ हादसा, गौड़ सिटी मॉल में थे मैनेजर

ग्रेटर नोएडा- वेस्ट
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Greater Noida west: ग्रेटर नोएडा वेस्ट से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने युवाओं की फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बॉडी बनाने और फिट रहने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाने का बढ़ता चलन अब कई बार जानलेवा भी साबित हो रहा है। ताजा मामला बिसरख गांव का है, जहां जिम में वर्कआउट करने के कुछ ही देर बाद 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई।

जिम से निकलते ही गिरा युवक

मूल रूप से बुलंदशहर निवासी 20 वर्षीय शरद कुमार ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौड़ सिटी मॉल के एक सैलून में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। वह अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य बताए जा रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे शरद जिम में एक्सरसाइज करने के बाद बाहर निकले। कुछ कदम चलने के बाद अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पास स्थित नाले की दीवार पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तीन महीने से कर रहे थे नियमित वर्कआउट

शरद के दोस्तों के अनुसार वह पिछले करीब तीन महीनों से बिसरख गांव स्थित एक जिम में नियमित रूप से वर्कआउट कर रहे थे। घटना वाले दिन भी वह सामान्य तरीके से जिम पहुंचे थे। कुछ देर बाद परिवार और दोस्तों को पुलिस का फोन आया, जिसमें बताया गया कि शरद की हालत गंभीर है और बाद में उनकी मौत की पुष्टि हो गई।

हार्ट अटैक की आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस की शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. गुप्ता के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। इसके पीछे खराब जीवनशैली, बढ़ता तनाव और अनियमित स्वास्थ्य जांच प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की बड़ी वजहें

विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार युवा बिना किसी मेडिकल जांच के अचानक भारी वर्कआउट शुरू कर देते हैं। कुछ लोगों में जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं या धमनियों में पहले से ब्लॉकेज मौजूद होता है, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं होती।

छिपी हुई हृदय संबंधी बीमारियां

कुछ युवाओं को हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी जैसी जेनेटिक बीमारियां होती हैं, जिसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। अत्यधिक शारीरिक दबाव पड़ने पर ऐसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

सप्लीमेंट और स्टेरॉयड का बढ़ता इस्तेमाल

जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में कई युवा बिना विशेषज्ञ सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट, प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स और अनाबोलिक स्टेरॉयड का सेवन करने लगते हैं। इनमें मौजूद अत्यधिक कैफीन और अन्य उत्तेजक तत्व हृदय गति और रक्तचाप को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकते हैं।

क्षमता से अधिक वर्कआउट

सोशल मीडिया पर दिखने वाले फिटनेस ट्रेंड और रील्स से प्रभावित होकर कई युवा अपनी क्षमता से अधिक वजन उठाने लगते हैं। अत्यधिक कार्डियो या हैवी वेट ट्रेनिंग दिल पर अचानक दबाव बढ़ा सकती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिम शुरू करने से पहले युवाओं को कम से कम एक बार ईसीजी (ECG) और 2D इको टेस्ट अवश्य करवाना चाहिए। इससे हृदय की छिपी हुई समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

यदि वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत व्यायाम रोककर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार के फैट बर्नर, प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट या स्टेरॉयड का सेवन नहीं करना चाहिए।

फिटनेस के साथ जागरूकता भी जरूरी

शरद कुमार की असमय मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या युवा फिटनेस के नाम पर अपनी सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ शरीर बनाने के लिए केवल जिम जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और वैज्ञानिक तरीके से किया गया वर्कआउट भी उतना ही जरूरी है।

फिटनेस की दौड़ में सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।