Greater Noida: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है।
Greater Noida: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों फ्लैट खरीदारों (Flat Buyers) के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। लंबे समय से दिवालिया प्रक्रिया में फंसे प्रॉजेक्टों (Projects) में निवेश करने वाले बायर्स के लिए अब उम्मीद की नई किरण जगी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत जब्त की गई बिल्डरों और उनके प्रवर्तकों की संपत्तियों से बैंकों और खरीदारों को पैसा लौटाने की मंशा जताई है। पढ़िए पूरी खबर…

40 हजार से अधिक बायर्स को मिल सकती है राहत
नोएडा (Noida) में इस समय 26 प्रॉजेक्ट दिवालिया प्रक्रिया में फंसे हुए हैं, जबकि कई पहले ही दिवालिया घोषित किए जा चुके हैं। ईडी के इस कदम से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लगभग 40 हजार से अधिक बायर्स को राहत मिलने की संभावना है। लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।
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ईडी और IBBI ने तैयार किया नया तंत्र
ईडी और इंसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) के बीच कई दौर की समन्वय बैठकों के बाद एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अंतिम रूप दिया गया है। IBBI ने इस संबंध में 4 नवंबर को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इसके तहत अब इंसाल्वेंसी प्रफेशनल मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत में मानक शपथपत्र दाखिल करेंगे, ताकि जब्त संपत्तियों को मुक्त कर प्रभावित पक्षों – यानी बैंकों और बायर्स – को लौटाया जा सके।
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दिवालिया प्रक्रिया में अब तक यह थी बड़ी बाधा
अभी तक की व्यवस्था में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि जब कोई रियल एस्टेट कंपनी कर्ज में डूबकर दिवालिया प्रक्रिया में जाती थी, तो उसका रेजोल्यूशन प्रफेशनल या तो कंपनी बेचने की कोशिश करता था या फिर नया वित्तीय प्लान बनाकर कर्ज चुकाने का प्रयास करता था। लेकिन अगर कंपनी या उसके प्रमोटर पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा हो, तो ईडी उसकी संपत्तियों को जब्त कर लेती थी। ऐसी स्थिति में संपत्तियां ‘फ्रीज़’ हो जाती थीं और उन्हें बेचना या उपयोग में लाना संभव नहीं होता था। नतीजतन, दिवालिया प्रक्रिया अटक जाती थी और इसका सीधा असर बैंकों, निवेशकों और खास तौर पर घर खरीदारों पर पड़ता था।
फंसे प्रॉजेक्टों को मिलेगी नई गति
ईडी और IBBI के इस संयुक्त कदम से अब इन जटिलताओं को दूर किया जा सकेगा। जब्त संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत मुक्त कराकर उनका उपयोग दिवालिया कंपनियों के समाधान में किया जा सकेगा। इससे रेरा के तहत फंसे प्रॉजेक्टों और रियल एस्टेट कंपनियों की समस्याओं को सुलझाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
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घर खरीदारों के लिए उम्मीद की नई किरण
यह कदम उन हजारों खरीदारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो वर्षों से अपने घरों की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार और नियामक एजेंसियों के इस समन्वय से न केवल फंसे हुए प्रॉजेक्टों को नई दिशा मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास भी बहाल होगा।
