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Flat Fire: करोड़ों के फ्लैट में लगी आग, पिता समेत 2 बच्चों की ऊपर से कूदने से मौत

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Flat Fire: 9वें फ्लोर पर लगी आग, फायर सिस्टम रहा नाकाम

Flat Fire: दिल्ली के द्वारका सेक्टर-13 (Dwarka Sector-13) की ‘शब्द अपार्टमेंट’ सोसाइटी (Shabd Apartment Society) में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने तीन जिंदगियां छीन लीं। बता दें कि 9वें फ्लोर के पेंटहाउस (Penthouse) में लगी आग में 10 साल की आशिमा यादव, 12 साल के शिव यादव और उनके चाचा यश यादव की मौत हो गई। आग की लपटों और धुएं के बीच फंसे परिवार को बचाने के लिए सोसाइटी का फायर फाइटिंग सिस्टम (Fire Fighting System) पूरी तरह नाकाम रहा। फायर हाइड्रेंट बंद था, पाइप में पानी नहीं था और गार्ड रूम का दरवाजा भी लॉक था। देखिए पूरा वीडियो…

लापरवाही ने बुझाई 3 जिंदगियां

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे के समय घर में मौजूद महिलाओं को किसी तरह सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन आशिमा, शिव और यश धुएं और आग में फंस गए। मदद की गुहार के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। यश ने आखिरी कोशिश में बच्चों को बालकनी से नीचे फेंका, उम्मीद थी कि कोई पकड़ लेगा, लेकिन तीनों बुरी तरह घायल हो गए और उनकी मौत हो गई।

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3600 रुपये मेंटेनेंस, फिर सुरक्षा क्यों नहीं?

‘शब्द अपार्टमेंट’ (Shabd Apartment) में फ्लैट की कीमत करोड़ों में है और हर महीने प्रत्येक निवासी से 3600 रुपये मेंटेनेंस चार्ज लिया जाता है। इसके बावजूद, फायर सिस्टम की जांच नहीं की गई। सवाल उठता है कि यह राशि सिर्फ सोसाइटी की सजावट, स्वीमिंग पूल और बिजली बिलों में खर्च होती है या निवासियों की सुरक्षा भी इसमें शामिल है? आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) ने सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं कराया? मेंटेनेंस एजेंसी ने फायर सिस्टम की जांच क्यों नहीं की?

Pic Social Media

हादसा या लापरवाही से हत्या?

यह महज हादसा नहीं, बल्कि सोसाइटी (Society) की लापरवाही का नतीजा है। जब फायर सिस्टम (Fire System) के नाकाम होने की जानकारी थी, तो उसे ठीक क्यों नहीं किया गया? आरडब्ल्यूए (RWA) के जिम्मेदार लोग सवालों से बचते नजर आए। क्या इस लापरवाही के लिए आरडब्ल्यूए और मेंटेनेंस एजेंसी (Maintenance Agency) पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा नहीं दर्ज होना चाहिए? दिल्ली सरकार से भी सवाल है कि क्या इस सोसाइटी का सेफ्टी ऑडिट हुआ था?

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निवासियों में गुस्सा, जवाबदेही की मांग

बता दें कि हादसे के बाद सोसाइटी (Society) के निवासियों में गुस्सा है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर मेंटेनेंस (Maintenance ) के लिए लाखों रुपये हर महीने इकट्ठा होते हैं, तो बच्चों की जान की हिफाजत क्यों नहीं हुई? क्या यह लापरवाही किसी मंत्री या बड़े अधिकारी के परिवार के साथ होती, तो भी यही चुप्पी रहती? निवासियों ने आरडब्ल्यूए और मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सेफ्टी ऑडिट की मांग की है।