Delhi News: नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद देशभर के शैक्षणिक माहौल में हलचल देखने को मिल रही है। कुछ जगहों पर छात्र इसे अपनी जीत मानकर राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे शिक्षा सुधार की प्रक्रिया में रुकावट मान रहे हैं। इसी विषय पर राजधानी दिल्ली के राजौरी गार्डन में एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें अलग-अलग वर्गों के लोगों ने अपने विचार रखे।
परिचर्चा में उठी यूजीसी नियमों को लेकर चिंताएं
इस परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र प्रताप सिंह के समक्ष कई वक्ताओं ने यूजीसी के नए नियमों पर खुलकर अपनी राय रखी। अखंड राजपूताना सेवा संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद सिंह (केपी सिंह) ने कहा कि हाल ही में लाया गया नया यूजीसी रेगुलेशन कई वर्गों की बात नहीं सुनता। उनके अनुसार यदि कोई गलत करता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सही को गलत ठहराना भी ठीक नहीं है। उन्होंने इस कानून में संशोधन की आवश्यकता बताई।
कानून बने, लेकिन भेदभाव न बढ़े
संघ के दिल्ली प्रदेश महामंत्री राम नारायण सिंह ने कहा कि कानून बनाना गलत नहीं है, लेकिन ऐसा कानून नहीं बनना चाहिए जिससे किसी एक वर्ग को बचाने के नाम पर दूसरे वर्ग का नुकसान हो। वहीं कोषाध्यक्ष और आरएसएस प्रचारक केवल बहादुर सिंह ने आशंका जताई कि नए यूजीसी नियम समाज में भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
छात्रों और शिक्षाविदों की राय
पिछड़े वर्ग से अंजू ने कहा कि यह कानून भेदभाव को बढ़ाने वाला है और इसके लागू होने से छात्रों के बीच दूरी बढ़ सकती है। डीपीएस स्कूल बहादुरगढ़ के कार्यकारी प्रधानाचार्य रमेश सिंह ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य बच्चों में समरसता और गुणवत्ता लाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी कानून नहीं होना चाहिए जो शिक्षा व्यवस्था को बांटने वाला हो।
परिचर्चा का निष्कर्ष
परिचर्चा में शामिल लोगों का मानना है कि यदि यूजीसी के नए नियम लागू होते हैं तो इससे प्रवेश प्रक्रिया, आरक्षण व्यवस्था और पाठ्यक्रम संरचना पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ने की आशंका जताई गई।
