Delhi News: दिल्ली सरकार ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के माध्यम से होने वाले संपत्ति लेनदेन में स्टांप ड्यूटी चोरी और प्रॉपर्टी फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तुत होने वाले हर GPA दस्तावेज़ की सब-रजिस्ट्रार स्तर पर विस्तृत जांच अनिवार्य होगी।
किन मामलों में होगी विशेष जांच?
नई व्यवस्था के तहत अधिकारी यह जांच करेंगे कि GPA दस्तावेज़ में:
- संपत्ति के बदले धनराशि (Monetary Consideration) का उल्लेख है या नहीं।
- कब्जा (Possession) सौंपने का प्रावधान है या नहीं।
- दस्तावेज़ अपरिवर्तनीय (Irrevocable) है या नहीं।
- संपत्ति को बेचने, उपहार देने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने का स्थायी अधिकार दिया गया है या नहीं।
करीबी रिश्तेदारों को छोड़ बाकी मामलों में नया नियम
अब माता-पिता, पति/पत्नी, बेटे, बेटी, भाई और बहन जैसे करीबी रक्त संबंधियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बनाए गए GPA का रजिस्ट्रेशन सीधे नहीं होगा। ऐसे सभी मामलों को पहले कलेक्टर ऑफ स्टांप्स के पास भेजा जाएगा, जो तय करेंगे कि दस्तावेज़ पर सामान्य GPA शुल्क लगेगा या फिर बिक्री विलेख (Sale Deed) के बराबर स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
30 दिन में फैसला, ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी बनेगा
कलेक्टर ऑफ स्टांप्स को ऐसे मामलों में 30 दिनों के भीतर लिखित आदेश जारी करना होगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा सरकार एक महीने के भीतर ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित करेगी, जिससे सभी मामलों की निगरानी की जा सके।
नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना GPA का रजिस्ट्रेशन करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा और मासिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से स्टांप ड्यूटी चोरी, भूमि माफिया और प्रॉपर्टी धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा सरकारी राजस्व की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
