Chhattisgarh News: रायपुर साहित्य उत्सव में भारतीय सोच और संस्कृति पर संवाद

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: रायपुर साहित्य उत्सव में भारतीय सोच और संस्कृति पर संवाद। यह कार्यक्रम मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा। परिचर्चा का संचालन प्रभात मिश्रा ने किया। इसमें डॉ. संजीव शर्मा और डॉ. संजय द्विवेदी मुख्य वक्ता रहे।

शिक्षा में भारत बोध की जरूरत

डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि शिक्षा में भारत बोध बहुत जरूरी है। नई शिक्षा नीति में भारतीय सोच को जगह दी गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति केवल अपने बारे में नहीं सोचती, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण की बात करती है। हमारी परंपरा विविधता में एकता को मानती है।

मानवीय मूल्यों से जोड़ती है शिक्षा

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि व्यक्ति को जाति-पाति और संकीर्ण सोच से ऊपर उठाना है। भारतीय परंपरा में मानव, पशु और प्रकृति सभी में ईश्वर का भाव देखा जाता है। इसलिए हमारी सांस्कृतिक शब्दावली को पढ़ाई का हिस्सा बनाना चाहिए।

पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता

डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा से ही भारत बोध से जुड़ा पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुगलों के आक्रमण शारीरिक थे, लेकिन अंग्रेजों ने मानसिक रूप से भारत को कमजोर किया। आज उस सोच से बाहर निकलना जरूरी है। बदलाव भारतीय दृष्टि से होना चाहिए, न कि पश्चिमी नकल से।

भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक

उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के साथ भारतीयता जरूरी है। पंचतंत्र जैसी कहानियों को नई तकनीक के साथ प्रस्तुत करना समय की मांग है, ताकि युवा पीढ़ी उनसे जुड़ सके।

भारतीय भाषाओं में ज्ञान का भंडार

डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों मौजूद हैं। आज का युवा भारतीय विचारों को दुनिया तक पहुंचा रहा है। भारत ने हमेशा अपने विचार उदाहरण के रूप में रखे हैं, कभी थोपे नहीं।

भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक सोच

उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में नदियों, पर्वतों और प्रकृति को देवता माना गया है। रामराज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां अंतिम व्यक्ति की भी सुनी जाती थी, जो लोकतांत्रिक भावना को दिखाता है।

पत्रकारिता में भी भारत बोध जरूरी

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता को भी भारतीय मूल्यों पर चलना चाहिए। पश्चिमी मॉडल भारत की सामाजिक जरूरतों के अनुसार नहीं है। भारत बोध को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलाना जरूरी है।

शिक्षा से मजबूत होगा भारत बोध

परिचर्चा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही भारत बोध को मजबूत करने का सबसे बड़ा माध्यम है। इससे भारतीय सांस्कृतिक चेतना को फिर से मजबूत किया जा सकता है।