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Chhattisgarh News: मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: मधुमक्खी पालन आज के समय में किसानों के लिए एक लाभदायक और अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बनता जा रहा है। शहद, मोम और पराग जैसे उत्पादों के कारण यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाते हैं, तो उनकी आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।

बलरामपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

छत्तीसगढ़ के Balrampur जिले में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन पर दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए किसानों ने उत्साह के साथ भाग लिया और नई तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें अतिरिक्त रोजगार के अवसर प्रदान करना था।

फसल विविधिकरण से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

जिला पंचायत की सीईओ Nayantara Singh Tomar ने कहा कि आज के समय में किसानों को केवल एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय फसल विविधिकरण (Crop Diversification) अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मधुमक्खी पालन जैसे व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में अच्छी बढ़ोतरी कर सकते हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

कम लागत और कम श्रम में शुरू हो सकता है यह व्यवसाय

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख G. K. Nigam ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि प्रदेश की जलवायु मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को आय का बेहतर विकल्प मिल सकता है।

शहद के साथ अन्य उत्पादों की भी बाजार में अच्छी मांग

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खी पालन से केवल शहद ही नहीं, बल्कि कई अन्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जैसे:

  • मोम (Wax)
  • रॉयल जेली (Royal Jelly)
  • प्रोपोलिस (Propolis)

इन सभी उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं।

5 से 10 मधुमक्खी बक्सों से शुरू कर सकते हैं व्यवसाय

अनुभवी मधुमक्खी पालक किसान Baidyanath ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसान अपने खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां लगाकर आसानी से इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे इसे बड़े स्तर पर बढ़ा सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।