Chhattisgarh News: जनजातीय इलाके से निकली प्रतिभा, अब इंटरनेशनल मैदान में चमक, किरण पिस्दा ने बनाई अपनी अलग पहचान

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की फुटबॉलर Kiran Pisda आज देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुकी हैं। एक छोटे से इलाके से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी को खास बनाता है।

शुरुआत में मिला परिवार और स्कूल का साथ

किरण को बचपन से ही खेल में रुचि थी और उन्हें स्कूल और परिवार से पूरा सहयोग मिला। उनके भाई, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।

स्कूल के दिनों से ही उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिलने लगा, जिससे उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया।

चुनौतियों से भरा रहा सफर

हालांकि किरण का सफर आसान नहीं था। जब वह पहली बार राष्ट्रीय शिविर में पहुंचीं, तब उनकी फिटनेस और मानसिक तैयारी उतनी मजबूत नहीं थी।

इस वजह से उनका चयन भारतीय टीम में नहीं हो सका। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इसे सीख के रूप में लिया।

खुद को बेहतर बनाने का कठिन दौर

किरण ने अपनी कमियों पर काम करना शुरू किया। उन्होंने अपनी फिटनेस सुधारी, खेल को बेहतर समझने के लिए मैचों का विश्लेषण किया और अपनी पोज़िशन को मजबूत किया।

सबसे बड़ा बदलाव उनकी सोच में आया। उन्होंने नकारात्मकता से दूर रहकर हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखी।

कोच का मिला अहम साथ

इस सफर में उनके कोच योगेश कुमार जांगड़ा ने अहम भूमिका निभाई। जब भी किरण का मन कमजोर होता, उनके कोच उन्हें प्रेरित करते और आगे बढ़ने के लिए हौसला देते।

हर पोज़िशन पर खेलने की खासियत

किरण की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत स्ट्राइकर के रूप में की, फिर मिडफील्ड में खेलीं और अब फुल-बैक के रूप में भी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।

यह क्षमता उन्हें टीम के लिए और भी महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सफर

किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और 2022 सैफ चैंपियनशिप टीम का हिस्सा भी रही हैं।

इसके अलावा, उन्होंने क्रोएशिया की महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब क्लब के लिए भी खेला है, जो उनकी बड़ी उपलब्धि है।

असफलताओं से मिली नई सीख

हाल ही में बड़े टूर्नामेंट में चयन न होने से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

उन्होंने इसे और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने का अवसर माना।

जनजातीय खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा

किरण मानती हैं कि जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन वहां के खिलाड़ियों को सही मंच नहीं मिल पाता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजन इन खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका देते हैं और उनके सपनों को नई दिशा देते हैं।

आगे का लक्ष्य

किरण का लक्ष्य है कि वह लगातार अच्छा प्रदर्शन करें और भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत बनाएं।

उनकी कहानी यह सिखाती है कि मेहनत, धैर्य और सकारात्मक सोच से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।