Chhattisgarh News: रायपुर शहर की बढ़ती पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने गजराज बांध को एक बड़े पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने की पहल की है। राजधानी रायपुर के कमल विहार क्षेत्र में स्थित यह बांध भविष्य में शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गजराज बांध को बनाने की योजना शहर की नई लाइफलाइन
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने लोकभवन में रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे और अतिरिक्त आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय के साथ बैठक कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि लगभग 230 एकड़ क्षेत्र में फैला गजराज बांध वर्तमान में सिंचाई कार्यों में उपयोग नहीं हो रहा है, लेकिन इसकी मरम्मत और पुनर्विकास के बाद इसे रायपुर शहर की नई लाइफलाइन बनाया जा सकता है।
पेयजल संकट के समाधान की दिशा में कदम
राज्यपाल का मानना है कि यदि गजराज बांध को पेयजल जलाशय के रूप में विकसित किया जाता है, तो शहर को शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। तेजी से बढ़ती आबादी और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए यह परियोजना रायपुर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
विभागों के बीच समन्वय पर जोर
बैठक के दौरान राज्यपाल ने नगर निगम और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बांध की वर्तमान स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधारों की योजना तैयार की जानी चाहिए, ताकि इसे प्रभावी जल भंडारण केंद्र में बदला जा सके।
शहर के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा का प्रयास
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गजराज बांध को आधुनिक जल संरचना के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायक होगा। इससे भूजल पर निर्भरता कम करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
जल प्रबंधन को लेकर बढ़ रही सक्रियता
छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और शहरी क्षेत्रों में जल संकट की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गजराज बांध को पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने की यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रायपुर के लिए बन सकता है बड़ा जल स्रोत
यदि यह योजना सफल होती है, तो गजराज बांध राजधानी रायपुर के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में उभर सकता है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
