Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा से जुड़ा खास पर्व अक्ती तिहार इस बार 20 अप्रैल को रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यभर के किसान, वैज्ञानिक और कृषि से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। यह आयोजन न केवल परंपरा को जीवित रखने का प्रयास है, बल्कि किसानों को नई तकनीक और जानकारी देने का भी एक बड़ा मंच बनेगा।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम होंगे मुख्य अतिथि
इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे। समारोह के दौरान कृषि मंत्री द्वारा प्रगतिशील किसानों को कृषि आदान सामग्री भी वितरित की जाएगी। इससे किसानों को खेती में नई शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी मेहनत को सम्मान भी मिलेगा।
मिट्टी और बीजों की पूजा से होगी शुरुआत
अक्ती तिहार के मौके पर धरती माता और बीजों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद प्रतीकात्मक रूप से बीज बुआई की शुरुआत होगी। यह परंपरा किसानों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन से खेती के नए कार्यों की शुरुआत होती है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और अच्छी फसल की कामना करने का प्रतीक भी है।
किसानों को नई तकनीक की जानकारी
इस कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। खास तौर पर बीज बुआई की नई तकनीक और कृषि में ड्रोन के उपयोग का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे किसानों को कम समय और कम लागत में बेहतर उत्पादन करने के तरीके समझने में मदद मिलेगी। यह पहल खेती को अधिक आधुनिक और लाभदायक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रासायनिक उर्वरकों के विकल्प पर प्रशिक्षण
अक्ती तिहार के दौरान किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि किसान प्राकृतिक और सुरक्षित खेती की ओर बढ़ सकें। इस तरह का प्रशिक्षण किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती करने के लिए प्रेरित करेगा और उनकी लागत भी कम कर सकता है।
राज्यभर में होगा आयोजन
यह आयोजन केवल रायपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और अनुसंधान केन्द्रों में भी अक्ती तिहार मनाया जाएगा। इससे राज्यभर के किसानों को इस पर्व से जुड़ने और नई जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
परंपरा और खेती का अनोखा संगम
अक्ती तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और कृषि संस्कृति का प्रतीक है। गांवों में इस दिन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और धान अर्पित कर खेती की शुरुआत की जाती है। यह पर्व किसानों को प्रकृति से जोड़ता है और उन्हें नई उम्मीद के साथ खेती शुरू करने की प्रेरणा देता है। इस तरह अक्ती तिहार परंपरा और आधुनिक खेती के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर सामने आता है।
